
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने वह जनहित याचिका खारिज कर दी है, जिसमें मैहर जिले के अमरपाटन में नये शवगृह बनाये जाने को चुनौती दी गई थी। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सुनवाई पश्चात् कहा कि अदालत किसी विशेषज्ञ संस्था की तरह वार्ड नंबर 7 के अलावा किसी दूसरी जगह पर मुर्दाघर बनाने की जगह तय नहीं कर सकती। मुर्दाघर बनाने का फ़ैसला स्वास्थ्य विभाग के साथ सलाह- मशविरा करके नगर परिषद को करना है। जिसमें न्यायालय दखल नहीं दे सकती। युगलपीठ ने उक्त मत के साथ दायर याचिका खारिज कर दी।
यह जनहित याचिका मैहर अमरपाटन निवासी धर्मेन्द्र बंसल की ओर से दायर की गई थी। जिसमें नगर पालिका परिषद द्वारा शवगृह निर्माण के लिये 16 जनवरी 2025 को जारी टेंडर को चुनौती दी गई थी। आवेदक की ओर से कहा गया था कि उनकी ओर से वार्ड नंबर 5 में स्थित पुराने शवगृह को हटाने के लिए कई बार शिकायत की गई, क्योकि उक्त क्षेत्र एक रिहायशी इलाका है और वहाँ स्कूल और मंदिर भी हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, शवगृह सरकारी अस्पताल के बगल में या उसी परिसर में बनाया जाना चाहिए। वहीं मामले में शासन की ओर से कहा गया कि कभी-कभी मुर्दाघर में अलग-अलग मृत लोगों के शव लाए जाते हैं और अस्पताल में मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए मुर्दाघर को किसी दूर की जगह पर बनाना बेहतर होता है। इतना ही नहीं वार्ड नंबर 7 में पहले से ही एक मुर्दाघर है और अब इसके नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त मत के साथ दायर याचिका खारिज कर दी।
