
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के तहत कृषि और ग्रामीण विकास के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। बैठक में दोनों मंत्रालयों के विभागीय रोडमैप, लखपति दीदी योजना के विस्तार तथा किसानों और ग्रामीणों के हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में ‘शक्ति की सप्त धारा’ का उल्लेख किया था। इसके तहत कृषि और खाद्य उत्पादन को मजबूत करने, खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
सरकार ने वैश्विक परिस्थितियों के बीच किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी दोहरायी है। कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए नये वैश्विक बाजार तलाशने तथा खाद और ईंधन जैसी आवश्यकताओं में देश को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया है।
ग्रामीण विकास से जुड़ी लखपति दीदी योजना के तहत अब तक तीन करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाए जाने की बात विज्ञप्ति में कही गयी है। प्रधानमंत्री ने इस संख्या को बढ़ाकर छह करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। श्री चौहान बैठक में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए योजना के विस्तार और क्रियान्वयन की रूपरेखा पर भी चर्चा करेंगे।
विज्ञप्ति के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जा रही है। महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘शी-मार्ट्स’ जैसी पहलों पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों को व्यापक तथा वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
श्री चौहान ने कहा कि श्री मोदी के नेतृत्व में घोषित ‘शक्ति की सप्त धारा’ कृषि और ग्रामीण भारत के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है और इसे जन-आधारित कार्यक्रमों, पारदर्शी निगरानी तथा प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
