सतना :जेल मुख्यालय के आदेश एवं राज्य शासन से घोषित परिहार का लाभ प्राप्त करते हुए 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल सतना से कुल 12 बंदियों को रिहाई मिली. हलांकि जेल प्रशासन द्वारा 13 बंदियों की रिहाई का प्रस्ताव भेजा गया था. लेकिन लेकिन 1 वृद्ध बंदी की पैरोल पर मृत्यु हो जाने के कारण 12 बंदियों की रिहाई की गई.अधीक्षक केंद्रीय जेल सतना श्रीमती लाना कोष्टा ने जानकारी देते हुए बताया कि 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे 12 बंदियों का रिहा किया गया.
रिहा होने वाले प्रत्येक बंदी को श्रीफल, आध्यात्म से जुडऩे के लिए श्रीमद् भगवद्गीता, प्रकृति से जुड़ाव के लिए फलदार आम का पौधा, लंच पैकेट, बंदी पारिश्रमिक पासबुक और बंदी का रिहाई प्रमाण पत्र प्रदान किया गया. इस अवसर पर जेल अधीक्षक ने रिहा हो रहे बंदियों को अपराध से दूर रहने, अपने शेष जीवन को सदमार्ग पर ले जाने और समाज की मुख्य धारा से जुडऩे के लिए शुभकामनाएं दीं. रिहा होने वाले बंदियों में सतना जिले के 3 बंदी सोमू कोल, लालजी कुशवाहा और कमलेश उर्फ नंदलाल मवासी सम्मिलित रहे. वहीं पन्ना जिले के पप्पू बसोर, संतोष उर्फ चार्ली आदिवासी, राजकुमार उर्फ चुनकू लोध, राजाराम अहीर और रामसिंह महदेले को रिहा किया गया. जबकि रिहा होने वाले छतरपुर जिले के बंदियों में बैजनाथ राजपूत, नंदकिशोर अहिरवार, रन्धीर लोधी शामिल रहे. इसी कड़ी में खुली जेल कालोनी सतना से आशीष उर्फ बाबा तिवारी को भी रिहाई मिली. रिहा होने वाले बंदियों को 4 से लेकर 6 वर्ष तक की अवधि की माफी प्राप्त हुई.
एक लाख से अधिक की कमाई
जेल में निरुद्ध रहने के दौरान किए गए परिश्रम के अनुरुप रिहा होने पर बंदियों को पारिश्रमिक पासबुक भी प्राप्त हुई. जिसके अनुसार नंदकिशोर को जहां 1 लाख 10 हजार 635, रामसिंह को 1 लाख 4 हजार 130 और संतोष को 1 लाख 2 हजार 785 रु प्राप्त हुए. वहीं रंन्धीर को 87 हजार 637, राजाराम को 84 हजार 731, सोमू को 82 हजार 311, राजकुमार को 80 हजार 775, कमलेश को 50 हजार और पप्पू को 40 हजार 13 रुपए बतौर पारिश्रमिक मिले. रिहा होने वाले 2 बंदी बैजनाथ और आशीष ऐसे भी रहे जिन्हें कोई पारिश्रमिक राशि नहीं मिली.
