
छतरपुर। महाराजपुर क्षेत्र के टटम गांव में सड़क, पुल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का आंदोलन करीब 18 घंटे तक चला। स्वतंत्रता दिवस पर शुरू हुआ पैदल मार्च बारिश के बीच महाराजपुर से आगे बढ़ते हुए छतरपुर की ओर जा रहा था। शनिवार रात तक विधायक कामाख्या प्रताप सिंह से मुलाकात नहीं होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और नारेबाजी भी की। बाद में प्रशासन की व्यवस्था से ग्रामीणों और बच्चों का प्रतिनिधिमंडल नौगांव सर्किट हाउस पहुंचा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में मढ़ापुरवा से टटम तक सड़क निर्माण, टपरन पुरवा से टटम तक पुल निर्माण और टटम के वार्ड नंबर 20 में बिजली सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल के अभाव में गांव के लोगों के साथ स्कूली बच्चों को भी आवागमन में परेशानी होती है। बरसात के दौरान नाले और खराब रास्तों के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है।
शनिवार शाम करीब 7 बजे बच्चे और ग्रामीण महाराजपुर तहसील पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखीं। संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलने पर उन्होंने छतरपुर की ओर पैदल जाने का निर्णय लिया। महाराजपुर थाना क्षेत्र की सीमा के पास उन्हें विधायक के आने की जानकारी दी गई। तेज बारिश के बावजूद बच्चे और ग्रामीण कई घंटे तक इंतजार करते रहे। विधायक के मौके पर नहीं पहुंचने पर कुछ आंदोलनकारियों ने उनके खिलाफ नारे भी लगाए। बाद में विधायक की ओर से निजी आवास पर बातचीत का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन ग्रामीणों ने सार्वजनिक स्थान पर चर्चा की मांग की।
देर रात प्रशासन की ओर से वाहनों की व्यवस्था कर 5-6 बच्चियों और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों के साथ नौगांव सर्किट हाउस भेजा गया। रात करीब 1:30 बजे विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई। ग्रामीण प्रतिनिधि सूरज अहिरवार के अनुसार विधायक ने तीनों मांगों पर निर्माण संबंधी कार्रवाई का आश्वासन दिया और बताया कि 3-4 दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी। आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ और रविवार तड़के करीब 2:30 बजे बच्चे व ग्रामीण वाहनों से अपने गांव लौट गए।
आंदोलन के दौरान बारिश में भीगते हुए बच्चों के पैदल चलने की तस्वीरों ने ग्रामीण क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें सड़क, पुल और बिजली के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। अब ग्रामीणों की नजर विधायक के आश्वासन पर है और वे देखना चाहते हैं कि तय समय में टेंडर प्रक्रिया शुरू होकर वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में वास्तविक काम कब शुरू होता है।
