इंदौर: किसी की आंखों में वर्षों बाद अपनों से मिलने की खुशी के आंसू थे… तो किसी की आंखें उन साथियों से बिछड़ने पर नम थीं, जिनके साथ जिंदगी के कई साल जेल की चारदीवारी में बीते. शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर केंद्रीय जेल इंदौर का मुख्य दरवाजा जब 11 बंदियों के लिए खुला तो आजादी का मतलब हर चेहरे पर अलग-अलग नजर आया. सजा पूरी कर चुके इन बंदियों के कदम जेल से बाहर निकले तो पीछे छूट रही थी वर्षों पुरानी जिंदगी और सामने था अपनों के बीच लौटने का रास्ता.जेल से रिहा होने वालों में मेघनगर, झाबुआ की यावलीबाई पति मांगीलाल भी थीं. वह पति की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रही थीं.
वर्षों जेल में रहने के बाद जब उन्हें बाहर आने का मौका मिला तो चेहरे पर भावनाओं की कई परतें नजर आईं. आजादी के दिन जेल की चारदीवारी से बाहर निकलना उनके लिए लंबे इंतजार के बाद आया पल था, मगर उन्हें कोई लेने नहीं आया तो उन्हें वन स्टॉप सेंटर भेजा गया. वहीं सरदारपुर के पवन पिता हारू और उसके भाई कैलाश भी शनिवार को जेल से बाहर आए. दोनों जमीन विवाद में हुई हत्या के मामले में सजा काट रहे थे, दोनों भाइयों के लिए भी यह दिन खास था. सजा पूरी होने के बाद जेल का दरवाजा उनके लिए खुला और दोनों ने बाहर की दुनिया में फिर कदम रखा. रिहाई के दौरान जेल के बाहर भावनाओं का अलग ही दृश्य था.
जिन परिजनों का लंबे समय से इंतजार था, उनसे मिलने की खुशी चेहरों पर दिखाई दे रही थी. वहीं जेल में वर्षों साथ रहे बंदियों से बिछड़ने का भाव भी कई चेहरों पर नजर आया. जेल की चारदीवारी में बीते समय ने इनके बीच रिश्ते तो नहीं बनाए थे, लेकिन लंबा साथ उन्हें एक-दूसरे का हमदर्द जरूर बना चुका था. बाहर निकलने से पहले साथी बंदियों से विदाई का पल भी भावुक कर गया. रिहा होने वालों में कसरावद, खरगोन के कमल पिता चंदू बंजारा, जगजीवन रामनगर के संजू पिता गंगाराम, फिरोज गांधी नगर के श्यामलाल पिता रतन, वाल्मीकि नगर के नरेश उर्फ डब्बू पिता भगवानदीन, खजराना के रशीद पिता अब्दुल रऊफ, झाबुआ के बबल पिता रतन, मनावर के गणेश पिता गोविंद और चंदन नगर के गज्जू उर्फ गजेंद्र पिता रमेश माली भी शामिल हैं. इस मौके पर केंद्रीय जेल अधीक्षक, दिनेश नरगावे ने नव भारत से चर्चा में बताया कि सजा की अवधि पूरी कर चुके 11 बंदियों को नियमानुसार रिहा किया है. रिहाई से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें जेल से बाहर जाने की अनुमति दी गई.
आजादी के दिन मिली नई शुरुआत
इन 11 बंदियों के लिए इस स्वतंत्रता दिवस का अर्थ सिर्फ देश की आजादी का जश्न नहीं था. इनके लिए यह व्यक्तिगत आजादी का भी दिन था. सजा पूरी होने के बाद जेल प्रशासन ने सभी की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की और उन्हें बाहर जाने की अनुमति दी. वर्षों बाद जेल का दरवाजा पार कर बाहर निकले इन बंदियों के लिए अब जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू होगा
