अहमदाबाद, गुजरात हाईकोर्ट ने खेड़ा रेप पीड़िता के 29 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सिविल अस्पताल की मेडिकल कमेटी की रिपोर्ट में गर्भपात को मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा बताया गया था, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
मां और नवजात शिशु के लिए निर्देश
हाईकोर्ट ने नाबालिग पीड़िता और होने वाले बच्चे की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बच्चे के जन्म के बाद उसकी पूरी मेडिकल देखभाल की जाएगी और उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देखरेख में अडॉप्शन एजेंसी को सौंपा जाएगा।
सरकार द्वारा वित्तीय सहायता और मुआवजा
इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह डिलीवरी का पूरा खर्च उठाए और जन्म के बाद छह महीने तक पोषण व इलाज की व्यवस्था करे। साथ ही, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को ‘पीड़ित मुआवजा योजना’ के तहत जल्द से जल्द मुआवजा देने के आदेश दिए गए हैं।

