किसान कल्याण वर्ष के दावों पर पटवारी ने मांगा आंकड़ों का हिसाब

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत सरकार द्वारा किए जा रहे दावों पर सवाल उठाते हुए किसानों की आय, खेती की लागत, फसलों के दाम, कर्ज और फसल बीमा भुगतान से जुड़े ताजा आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।

पटवारी ने कहा कि सरकार को मंचों, महोत्सवों और घोषणाओं से आगे बढ़कर यह प्रमाणित करना चाहिए कि किसानों की आर्थिक स्थिति वास्तव में सुधरी है। उन्होंने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2018-19 में मध्यप्रदेश के 48.4 प्रतिशत कृषि परिवार कर्जदार थे और प्रति कृषि परिवार औसत बकाया कर्ज 74,420 रुपये था। यह आंकड़ा केन्द्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया था।

उन्होंने बताया कि एनएसओ के ‘सिचुएशन असेसमेंट सर्वे’ के अनुसार 2018-19 में मध्यप्रदेश के कृषि परिवार की औसत मासिक आय 8,339 रुपये थी, जो 10,218 रुपये के राष्ट्रीय औसत से कम थी।

पटवारी ने सवाल किया कि किसानों को वास्तव में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिल रहा है या नहीं। उन्होंने फसलवार खरीदी, लागत और किसानों को मिली वास्तविक कीमत के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाजार भाव गिरने पर किसानों को प्रभावी संरक्षण मिलना चाहिए।

बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, मजदूरी और सिंचाई की बढ़ती लागत के साथ अनियमित बारिश, बाढ़ और सूखे से पैदा होने वाले जोखिमों पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा। फसल बीमा के तहत जिले और फसलवार निपटाए गए, लंबित दावों तथा वास्तविक नुकसान के मुकाबले दिए गए मुआवजे का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

पटवारी ने एनसीआरबी के 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि से जुड़े 835 लोगों ने आत्महत्या की, जिससे राज्य देश में तीसरे स्थान पर रहा।

उन्होंने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष’ तभी सार्थक होगा, जब किसानों की आय बढ़े, लागत घटे, एमएसपी का प्रभावी संरक्षण मिले और मुआवजा समय पर मिले। उन्होंने कहा, “किसानों को मंच नहीं, मुनाफा चाहिए; घोषणाएं नहीं, गारंटी चाहिए और भाषण नहीं, बाजार चाहिए।”

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