रीवा:बरसात के महीने में गौवंश सडक़ो में आराम फरमा रहे है, पशु पालक दूध निकालने के बाद गौवंश को घरों में रखने के बजाय छोड़ रहे है. न तो गौवंशो को सडक़ो से हटाने के लिये नगर निगम कोई कार्यवाही कर रहा और न ही पशु पालकों के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही हो रही है. लिहाजा हाइवे से लेकर शहर के मुख्य मार्गो में आवारा गौवंश धमाचौकड़ी मचाते रहते है.
गौवंशों के लिये जिले भर में गौशाला संचालित हो रही है, कई गौशाला कागजों तक ही सीमित रह गई है और कुछ जगह केवल खानापूर्ति हो रही है. गत वर्ष हाइवे में गौवंश की सडक़ दुर्घटना को लेकर अधिकारियो की टीम बनाई गई थी, जिससे कुछ हद तक राहत मिली थी.
गौवंश को खुले में छोडऩे वाले पशु पालकों के खिलाफ जुर्माना की कार्यवाही का प्रावधान है लेकिन कहीं भी कार्यवाही नही होती है. रीवा-सतना मार्ग में पडऱा से लेकर चोरहटा बाईपास तक सडक़ के दोनो तरफ गौवंश बैठे रहते है. जहा पर बस्ती होती है वही गौवंश सडक़ो पर नजर आते है. दरअसल यह गौवंश बाहर के नही बल्कि इसी बस्ती के होते है. इसी तरह रीवा-इलाहाबाद, रीवा-गुढ़, रीवा सेमरिया सहित विभिन्न मार्गो में गौवंश सडक़ो में बैठे नजर आते है. पानी गिरने के बाद कीचड़ से बचने के लिये सडक़ पर गौवंश आ जाते है और सडक़ हादसे का शिकार होते है. शहर के अंदर नगर निगम एक-दो गौवंश को पकड़ कर फोटो खिचाने तक की कार्यवाही करता है. जबकि शहर के मुख्य बाजार में खुलेआम खतरनाक बैल एवं अन्य गौवंश घूमते रहते है, जिनसे व्यापारी भी परेशान है.
शहर के सब्जी मंडी स्थित व्यापारियों ने बताया कि सुबह से लेकर देर रात तक गौवंश धमाचौकड़ी मचाते है. सब्जी मंडी के अलावा प्रकाश चौराहा एवं घोड़ा चौराहा मुख्य मार्ग में खड़े रहते है. कई खतरनाक बैल है जो ग्राहको को खदेड़ लेते है और मारते है. नगर निगम ऐसे गौवंशो को नही पकड़ा, शिकायत के बाद भी कोई नही आता, जबकि तमाम संसाधन मौजूद है.
