इंदौर: सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना में मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जिले के करीब 180 पंजीकृत किसान ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनकी सोयाबीन बिक्री के बाद भावांतर की राशि शासन स्तर से उनके बैंक खातों में तीन-चार बार से अधिक अंतरित की गई, लेकिन इसके बावजूद किसानों को राशि प्राप्त नहीं हुई.अब इन किसानों को भुगतान दिलाने के लिए जिला स्तर पर समिति गठित कर बैंक संबंधी समस्याओं का निराकरण किए जाने की बात कही जा रही है. मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक सह आयुक्त कुमार पुरुषोत्तम के कार्यालयीन पत्र क्रमांक 1226, दिनांक 3 अगस्त 2026 से सामने आई जानकारी ने पूरी भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जब शासन स्तर से राशि कई बार खातों में अंतरित किए जाने का प्रयास किया गया, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में किसान भुगतान से वंचित क्यों रह गए, यह सवाल अब महत्वपूर्ण हो गया है. किसान हित में शुरू की गई भावांतर योजना की राशि पाने के लिए अब किसानों को ही संबंधित मंडियों में बैंक से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है. यानी शासन द्वारा भुगतान की प्रक्रिया पूरी किए जाने के प्रयासों के बावजूद राशि किसानों तक नहीं पहुंची और अब लंबित भुगतान की समस्या दूर करने के लिए दस्तावेज जुटाने की जिम्मेदारी भी किसानों पर आ गई है.
मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिला स्तरीय समिति के सदस्यों को किसानों की परेशानी शीघ्र दूर कर भावांतर की राशि दिलाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद समिति द्वारा बैंक खातों से संबंधित समस्याओं का निराकरण किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. हालांकि, किसानों को भुगतान के लिए अब तक कितने स्तरों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और करीब 180 किसानों का भुगतान किन तकनीकी अथवा बैंकिंग कारणों से अटका, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
दस्तावेज उपलब्ध कराने की अपील
जिला नोडल मंडी सचिव ओ.पी. खेड़े ने किसानों से संबंधित मंडियों में बैंक दस्तावेज उपलब्ध कराने की अपील की है. मंडी प्रशासन की ओर से कहा गया है कि दस्तावेज मिलने के बाद बैंक संबंधी समस्याओं का निराकरण कर भावांतर राशि का भुगतान कराया जाएगा.
बार-बार चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे
सवाल यह है कि शासन की योजना का लाभ पाने के लिए किसान को बार-बार दस्तावेज लेकर मंडी के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं? यदि राशि कई बार बैंक खातों में भेजी जा चुकी थी, तो उसका वास्तविक भुगतान क्यों नहीं हो पाया और इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी, यह स्पष्ट किया जाना बाकी है. फिलहाल करीब 180 किसान अपनी मेहनत की उपज की भावांतर राशि के लिए भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं
