करोड़ों की जल योजनाओं के बावजूद दूषित पानी से कब मिलेगी राहत?

इंदौर: हमारे शहर की स्वच्छता को देशभर में मिसाल के रुप में बताया जाता है, लेकिन शहर के कई इलाकों में लोगों के घरों तक साफ पानी नहीं पहुंच रहा. सवाल यह है कि करोड़ों की जल योजनाओं के बावजूद आखिर नागरिकों को दूषित पानी से राहत कब मिलेगी?
स्वच्छता के मामले में लगातार देश का गौरव बढ़ाने वाले इंदौर शहर में पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. शहर के कई इलाकों में नर्मदा लाइन से आने वाले पानी में गंदगी और बदबू की शिकायतें सामने आ रही हैं. रहवासी मजबूरी में यही पानी इस्तेमाल करने को विवश हैं. चिंता की बात यह है कि दूषित पानी की शिकायतें कोई नई नहीं हैं. कई क्षेत्रों में रहवासियों द्वारा निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायतें करने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर होने की आशंका रहती है, क्योंकि पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से गंदा पानी मिलने का खतरा बढ़ जाता है.
एक ओर शहर में जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर नागरिकों को पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा. सवाल सीधा है, किसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही कब तय होगी? वहीं क्षेत्रीय पार्षदों से इस समस्या से तुरंत निपटने की तैयारी पर भी बात की गई.

इनका कहना है…
हमने पूरे क्षेत्र में अपने नंबर दे रखे हैं, शिकायत मिलने पर सबसे पहले हम ट्यूबवेल या टैंकर से पानी सप्लाई करते हैं. तुरंत समाधान के लिए तैयार हैं.
– राजेंद्र राठौड़, पार्षद, वार्ड 32, परदेसीपुरा

पूरा ध्यान रखा जा रहा है, अमृत 2 योजना में कोई लाइन बदली जा रही है. जहां बरसात होने पर जल जमाव होता था, वहां निकासी कर दी गई है.
– संध्या जायसवाल, पार्षद, वार्ड 19, सांवेर रोड

क्षेत्र में लगातार गंदा पानी आ रहा है. 50 प्रतिशत नल और सीवरेज लाइन बदली जा चुकी हैं. बाकी के लिए प्रस्ताव दिया है, लेकिन निगम पास नहीं कर रहा.
– फातिमा खान, पार्षद, वार्ड 2, चंदन नगर

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