जयपुर, 11 अगस्त (वार्ता) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरकार और समाज के बीच निरंतर संवाद पर बल देते हुए इसे नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में कारगर बताया है और कहा कि सामाजिक न्याय को नीतियों की आत्मा और योजनाओं का सार मानते हुए राज्य सरकार सबका साथ-सबका विकास की भावना से कार्य कर रही है, जिससे वंचित वर्गों का अभूतपूर्व उत्थान हो रहा है। श्री शर्मा मंगलवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सेवानिवृत्त अधिकारियों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए सरकार की नीतियों और योजनाओं को धरातल तक पहुंचाया और जनसेवा की है। अधिकारी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होते हैं, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारियों से कभी नहीं। उनका दायित्व है कि वे वर्षों के प्रशासनिक अनुभव, जमीनी परिस्थितियों के व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव का उपयोग करते हुए युवाओं को मार्ग दिखायें।
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी समाज के प्रेरणा स्रोत हैं और समाज उनके अनुभव एवं कार्यों का अनुकरण करता है। ऐसे में विकसित राजस्थान के संकल्प को साकार करने में उनका सहयोग और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार स्थानीय आवश्यकताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विकास का रोडमैप बना कर पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य सहित बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। रामजल सेतु लिंक परियोजना एवं यमुना जल समझौते जैसे महत्वपूर्ण कार्य डबल इंजन सरकार की इच्छाशक्ति का परिणाम हैं। हमारी सरकार ने महज ढाई वर्ष में 12 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट और पंच गौरव जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर भंडारण एवं प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। दस हजार से अधिक जनसंख्या वाले गांवों में वंचित वर्ग की आबादी हेतु सड़क, पेयजल, वेस्ट मैनेजमेंट आदि के विकास के लिए बाबा साहेब अंबेडकर आदर्श ग्राम विकास योजना के तहत कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत करीब सवा चार लाख और अनुसूचित जनजाति उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4 लाख 30 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है।
उन्होंने कहा कि अंबेडकर तीर्थ स्थल यात्रा योजना के तहत बाबा साहब के स्मृति स्थलों का भम्रण, डॉ. भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत 887 करोड़ रुपये का ऋण वितरण तथा बारां जिले में पीएम-जनमन के तहत 14 हजार 636 पात्र परिवारों के आशियाने का सपना साकार हुआ है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को देय मैस भत्ते की राशि को दो हजार 500 रुपये से बढ़ाकर तीन हजार 250 रुपये प्रतिमाह और खेल अकादमियों में देय मैस भत्ते की राशि को 2 हजार 600 रुपये से बढ़ाकर चार हजार रुपये प्रतिमाह किया गया। उन्होंने कहा कि मां-बाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में पिछले दो साल में लगातार 10-10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वहीं, 250 नए मां बाड़ी केंद्र खोलने के आदेश भी जारी किये जा चुके हैं।
सेवानिवृत्त अधिकारियों ने छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि, निःशुल्क कोचिंग योजना, कौशल विकास सहित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विरुद्ध अत्याचार के मामलों में प्रभावी जांच एवं त्वरित कार्रवाई के लिए भी सरकार की सराहना की।
इस दौरान ललित के. पंवार, जे.पी. चंदेलिया, रवि प्रकाश मेहरड़ा, ओम प्रकाश बैरवा एवं अनिल गोठवाल सहित भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय राजस्व सेवा तथा प्रशासनिक एवं अन्य सेवाओं के सेवानिवृत्त अधिकारी मौजूद थे।
