नयी दिल्ली, 11 अगस्त (वार्ता) दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को लेकर आम आदमी पार्टी (आप ) नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाये हैं।
श्री सूद ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़कायी गयी, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि आप के नेताओं ने दंगों से जुड़ी साजिश और हिंसा के आरोपों को नजरअंदाज किया तथा पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को राजनीतिक संरक्षण देने का प्रयास किया।
उन्होंने आप नेताओं के कथित दोहरे राजनीतिक मापदंड पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि यदि आप का कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे दोगुनी सजा मिलनी चाहिए, जबकि विधायक अमानतुल्लाह खान ने ताहिर हुसैन का सार्वजनिक रूप से बचाव किया था।
गृह मंत्री ने कहा कि ताहिर हुसैन को खुफिया विभाग के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ दोषी के लिए कड़ी सजा की बात करना और दूसरी तरफ आरोपी के बचाव में खड़ा होना राजनीतिक विरोधाभास को दर्शाता है।
श्री सूद ने दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद के भाषणों में अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा का जिक्र किया गया था और लोगों से सड़कों को बाधित करने तथा ‘चक्का जाम’ की अपील की गयी थी। उनके अनुसार, 22-23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के आसपास विरोध-प्रदर्शन और सड़क अवरोध के बाद मौजपुर-जाफराबाद क्षेत्र में झड़पें हुईं और 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में आगजनी और पथराव की घटनाएं हुईं तथा दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की ड्यूटी के दौरान मौत हुई। पचीस फरवरी को चांद बाग इलाके में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की घटना सामने आयी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेताओं और प्रतिनिधियों ने हिंसा के आरोपियों का बचाव किया तथा कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों को ही जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली को किसी भी ऐसे राजनीतिक ‘टूलकिट’ या साजिश का शिकार नहीं बनने दिया जायेगा, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करना हो।
