
नीमच। विशेष लोक अभियोजन श्रीमती कीर्ति शर्मा ने बताया कि थाना सिंगोली के चर्चित, चिन्हित, जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में माननीय विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, नीमच श्री आलोक कुमार सक्सेना के न्यायालय द्वारा विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 39/2021 में दिनांक 07 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया गया है, जिसमें न्यायालय द्वारा आरोपी छीतर पिता जयराम गुर्जर, उम्र 36 वर्ष, निवासी-ग्राम पाटन, तहसील-सिंगौली, जिला-नीमच को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 302 के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 1,000रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।
घटना का संक्षिप्त विवरण:-
दिनांक 26 अगस्त 2021 की सुबह काना उर्फ कन्हैयालाल भील अपने साथी गोविंद के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर उसकी पत्नी को ढूंढने के लिये ग्राम बाणदा से ग्राम जेतलिया होते हुए सिंगोली-नीमच रोड पर पहुंचा। दोनों वहां आने-जाने वाले वाहन वालों से उसकी पत्नी के बारे में पुछताछ कर रहे थे।
दोनो तलाश करते हुए ग्राम अथवाकलां फंटे के पास पहुंचे। गोविन्द ने अपनी मोटरसाइकिल सडक़ किनारे खड़ी कर दी, जबकि काना उर्फ कन्हैयालाल हाथों में पत्थर लेकर सडक़ पर खड़ा होकर उसकी पत्नी की तलाश कर रहा था तथा आने-जाने वाले वाहनों को रोककर उसके संबंध में पूछताछ कर रहा था।
इसी दौरान सुबह लगभग 06 बजे आरोपी छीतर गुर्जर मोटरसायकल से तेजगति से वहां आया और काना उर्फ कन्हैयालाल को जानबूझकर सामने से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि काना उर्फ कन्हैयालाल सडक़ पर गिर गया और उसके सिर में गंभीर चोट आई। आरोपी छीतर भी मोटरसाइकिल सहित गिर गया थ। इसके बाद आरोपी छीतर ने काना उर्फ कन्हैयालाल के साथ मारपीट की। घटना को देखकर गोविन्द सेन भयभीत हो गया और अपनी मोटरसाइकिल लेकर वहां से ग्राम डाबी चला गया। बाद में उसे जानकारी मिली कि काना उर्फ कन्हैयालाल की चोटों के उपचार के दौरान नीमच अस्पताल में मृत्यु हो गई हैं।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा अपराध पंजीबद्ध किया जाकर उसकी विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान घटना स्थल का निरीक्षण कर भौतिक साक्ष्य एकत्र किए गए तथा आरोपियों से पूछताछ की गई। विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया कि मृतक काना उर्फ कन्हैयालाल को रस्सी से बांधकर पिकअप वाहन से घसीटा गया था। इस घटना के संबंध में विडियों सोशल मीडिया पर वायरल हुवे थे, जो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने थे। घटना की गंभीरता को देखते हुवे प्रकरण को जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में चिन्हित किया गया था।
प्रकरण की विवेचना के दौरान घटना में प्रयुक्त वाहनों, मोबाइल फोन तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जब्त किया गया। इसके अतिरिक्त विवेचना के दौरान घटना स्थल से संबंधित साक्ष्य, चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक साक्ष्य तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजो को एकत्रित कर विवेचना के उपरांत अभियोग-पत्र माननीय विशेष न्यायालय, नीमच में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन की सशक्त पैरवी:-
विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा सभी महत्वूपर्ण गवाहो के बयान कराये गये व विवेचना के दौरान एकत्रित की गई सभी साक्ष्यों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर प्रमाणित कराई गई। अपराध की गंभीरता को देखते हुवे पुलिस अधिक्षक महोदय, नीमच द्वारा नोडल ऑफिसर की नियुक्ती की जाकर समय-समय पर प्रकरण की मॉनीटरींग की गई।
न्यायालय का महत्वपूर्ण निष्कर्ष:-
अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर न्यायालय द्वारा प्रकरण में प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी व वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। साक्ष्यों के परीक्षण के उपरांत आरोपी छीतर गुर्जर को उपरोक्तानुसार दण्ड से दण्डित किया गया तथा शेष अन्य 07 आरोपीगण को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया।
आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड:-
माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी छीतर गुर्जर मृतक काना उर्फ कन्हैयालाल भील को पीकअप वाहन से बांधकर घसीटकर क्रुरतापूर्वक उसकी हत्या करने पाते हुवे भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 302 के अंतर्गत आजीवन कारावास एवं 1,000 रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी विषेष लोक अभियोजक श्रीमती कीर्ति शर्मा एवं श्री अशोक कुमार सोनी द्वारा की गई।
