
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए यह बात कही। इस याचिका में एसआईआर अपीलीय ट्रिब्यूनलों द्वारा मामलों के जल्द से जल्द और सुव्यवस्थित निपटारे के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
उच्चतम न्यायालय ट्रिब्यूनलों के कामकाज को प्रभावित करने वाली चीजों और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों की जांच करने पर सहमत हुई, लेकिन स्पष्ट किया कि वह अपीलों के निपटारे के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं कर सकती। इस मामले को इसी तरह की एक अन्य याचिका के साथ संलग्न करते हुए अगली सुनवाई 25 अगस्त के लिए तय की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि अब तक एक प्रतिशत से भी कम अपीलों का निपटारा हो सका है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत ट्रिब्यूनलों की संख्या, उनके काम करने के घंटे और मामलों के निपटारे की दर की समीक्षा करेगी। पीठ ने मतदाता सूची से नाम हटने के कारण लोगों को जन वितरण प्रणाली के लाभ से वंचित किए जाने के मुद्दे पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि इस विषय को उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों की अध्यक्षता वाले इन अपीलीय ट्रिब्यूनलों का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद किया गया था। हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि वर्तमान गति से लगभग 34 लाख लंबित अपीलों को निपटाने में 21 साल का समय लग सकता है।
