नयी दिल्ली, 10 अगस्त (वार्ता) वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) की ओर से 17-18 अगस्त को यहां दो दिवसीय पीएसबी विचार-विमर्श सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) के प्रमुख लोग एक साथ आएंगे।
वित्त मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य सहयोगात्मक संवाद को प्रोत्साहन देना, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना और जन-केंद्रित परिणामों पर विशेष ध्यान देते हुए व्यावहारिक, समयबद्ध रणनीतियां को तैयार करना है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी उपस्थित होंगे।
पीएसबी सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले संस्थानों के लिए पहचाने गए विषयों पर विचार-विमर्श करने, सत्यापित प्रथाएं साझा करने और बैंकिंग इकोसिस्टम में अपनाए जाने योग्य व्यावहारिक पहलों पर चर्चा हेतु एक मंच के तौर पर कार्य करेगा। विज्ञप्ति के अनुसार सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं कई विषयगत क्षेत्रों पर आयोजित की जाएंगी, जिनमें से प्रत्येक का समन्वय संस्थानों के एक नामित समूह की ओर से किया जाएगा। ये विषयगत क्षेत्र जमा जुटाने, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र में सहयोग, वैश्विक क्षमता केंद्रों की मदद, कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला इंफ्रास्ट्रक्चर, क्रेडिट कार्ड व्यवसाय की पुनर्कल्पना और प्राथमिकता क्षेत्र लेंडिंग पर आधारित होंगे।
इन विषयों का चयन नागरिक कल्याण और समावेशी आर्थिक विकास से सीधे तौर पर संबंधित होने के चलते किया गया है। चर्चाओं में किफायती क्रेडिट हेतु उपलब्ध संसाधन आधार को सुदृढ़ करना, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के लिए निवेश चक्र को आसान बनाना, क्षमता केंद्र पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना, फसल कटाई के बाद की जरूरतों और बाजार संपर्क को पूरा करने के लिए ग्रामीण मूल्य वर्धन अवसंरचनाओं को सुदृढ़ करना, वंचित वर्गों को औपचारिक कर्ज प्रदान करने के लिए प्राथमिकता क्षेत्र लेंडिंग देना और युवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकिंग उत्पादों को तैयार करना, जैसे विषयों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
विज्ञप्ति के अनुरार, पीएसबी सम्मेलन में लगभग 125 प्रतिनिधियों के उपस्थित रहने की उम्मीद है जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और नाबार्ड, एक्जिम बैंक, सिडबी, एनएचबी, आईआईएफसीएल, आईएफसीआई और एनएबीएफआईडी जैसे सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक, साथ ही भारतीय बैंक संघ और वित्तीय सेवाएं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
