जज का पद संवैधानिक ट्रस्ट, न्याय की आस रखने वालों के लिए अदालत अंतिम केंद्र

जबलपुर। वकालत के अनुभव से न्यायाधीश की संवैधानिक जिम्मेदारी तक पहुंचे जस्टिस अमित लाहोटी ने सोमवार को शपथ गृहण के साथ अपना पदभार संभाला। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बार से बेंच में स्थान मिलना महज पद परिवर्तन नहीं है। इसके साथ गहन दायित्वबोध भी जुड़ता है। हाईकोर्ट जज का पद संवैधानिक ट्रस्ट का पद है, क्योंकि न्याय की अपेक्षा रखने वाले व्यक्ति के लिए अदालत उसकी आशा का अंतिम केंद्र होती है।

कोर्ट नंबर-एक में आयोजित हुए उक्त समारोह में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखूंगा। उन्होंने अपने माता-पिता के संस्कारों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने हमेशा सिखाया कि परिस्थितियां अनुकूल हों तो धरातल पर रहना चाहिए और जब परिस्थितियां विपरीत हों तो पूरी ताकत के साथ उनका सामना करना चाहिए। उनके इस मार्गदर्शन को वह न्यायाधीश के रूप में भी अपने आचरण का आधार बनाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने संबोधन में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ग्वालियर के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संस्था ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उसकी भूमिका अविस्मरणीय रही है। बार से बेंच तक पहुंचे जस्टिस लाहोटी के संबोधन में अपने पेशेवर सफर के प्रति कृतज्ञता और न्यायिक दायित्व के प्रति संकल्प दोनों स्पष्ट दिखाई दिए।

एसीजे विवेक रूसिया ने दिलाई शपथ-

मप्र हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने कोर्ट रूम नंबर-एक में जस्टिस अमित लाहोटी को अतिरिक्त न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इससे पूर्व रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह ने उनकी नियुक्ति संबंधी पत्र का वाचन किया। समारोह में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने केंद्र शासन, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने राज्य शासन, अतिरिक्त महाधिवक्ता हितेंद्र एस कुशवाहा ने मप्र स्टेट बार काउंसिल, अमित जैन ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के कार्यकारी अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष तथा उमाकांत शर्मा ने सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में जस्टिस अमित लाहोटी के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित किया।

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