एम्स जैसे प्रमुख संस्थानों में मरीजों की जेब पर बढ़ाया जा रहा है बोझ-गहलोत

जयपुर, 10 अगस्त (वार्ता) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने केन्द्र सरकार पर मरीजों पर बोझ बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह जनता को सस्ते और सुलभ स्वास्थ्य सेवा का भरोसा देती रही है लेकिन जमीनी हकीकत में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जैसे प्रमुख संस्थानों में भी मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।

श्री गहलोत ने सोमवार को अपने बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि एम्स जोधपुर में 12 अगस्त से जनरल वार्ड, सेमी-प्राइवेट और प्राइवेट रूम के किराए में भारी बढ़ोतरी लागू हो रही है। जनरल वार्ड का किराया 60 रुपए प्रतिदिन, सेमी-प्राइवेट रूम 1200 रुपए प्रतिदिन और प्राइवेट रूम 3500 रुपए प्रतिदिन तो किया ही गया है, साथ ही अग्रिम भुगतान क्रमशः 2500, 8500 और 25,000 रुपए तय की गई है। इस नए फैसले से मरीजों एवं परिजनों में निराशा है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय आया है जब आम आदमी पहले से ही महंगाई और इलाज के बढ़ते खर्च से जूझ रहा है। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार जनता को सस्ते और सुलभ स्वास्थ्य सेवा का भरोसा देती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में एम्स जैसे प्रीमियर संस्थानों में भी मरीजों की जेब पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एम्स की अपनी प्रतिष्ठा है। गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज, जो एम्स जैसे संस्थानों में भरोसे के साथ इलाज कराने आते हैं, उन्हीं पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना संवेदनहीनता है। एम्स प्रशासन को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

 

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