
नई दिल्ली, लोकसभा ने मंगलवार को बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को मंजूरी दे दी। इसका मकसद 135 साल पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को बदलकर बैंकिंग रिकॉर्ड के कानूनी ढांचे को डिजिटल युग के हिसाब से बनाना है।
सरकार का कहना है कि पुराना कानून फिजिकल बहीखातों के लिए बना था। आज बैंकिंग पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में रिकॉर्ड को ऑनलाइन, क्लाउड या ऑफसाइट स्टोर करने की मान्यता देना जरूरी था।
*नए बिल में क्या खास है?*
1. *बैंकर्स बुक्स की नई परिभाषा*: अब इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड लोकेशन पर रखे गए रिकॉर्ड को भी ‘बैंकर्स बुक्स’ माना जाएगा। पहले सिर्फ लिखित या मैग्नेटिक टेप वाले रिकॉर्ड शामिल थे।
2. *डिजिटल रिकॉर्ड की पेशी आसान*: कोर्ट में डिजिटल रिकॉर्ड पेश करने के लिए खास सर्टिफिकेट फॉर्मेट और अंडरटेकिंग तय की गई है। इससे कॉपी की प्रामाणिकता साबित करने में मदद मिलेगी।
3. *’स्पेशल कॉज’ साफ किया गया*: अब कोर्ट तभी बैंक अधिकारियों को रिकॉर्ड या गवाही के लिए बुला सकेगा जब रिकॉर्ड की सटीकता पर शक हो, रिकॉर्ड रखने में गड़बड़ी हो या बैंक निरीक्षण आदेश न माने।
सुप्रीम कोर्ट के वकील अंशुल गुप्ता के मुताबिक चेक बाउंस जैसे मामलों में बैंक अधिकारियों को बार-बार कोर्ट नहीं आना पड़ेगा। इससे मुकदमों का निपटारा जल्दी होगा।
*डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी पर चिंता*
कानूनी जानकारों ने बिल का स्वागत किया है, लेकिन डेटा सुरक्षा पर सवाल भी उठाए हैं।
एडवोकेट दीपक जोशी ने कहा कि बिल में हैश वैल्यू जैसे आधुनिक सेफगार्ड नहीं जोड़े गए। हैश वैल्यू एक डिजिटल फिंगरप्रिंट है जिससे पता चलता है कि फाइल से छेड़छाड़ नहीं हुई। गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड आसानी से शेयर हो सकते हैं, जिससे डेटा लीक का खतरा बढ़ेगा।
बैंकिंग एक्सपर्ट देवीदास तुलजापुरकर ने कहा कि ब्रांच हेड से नेटवर्क और डिवाइस को साइबर खतरे से सुरक्षित सर्टिफाई कराना अव्यवहारिक है। एक ब्रांच मैनेजर डेटा सेंटर या क्लाउड को कंट्रोल नहीं करता। उन्होंने सुझाव दिया कि टेक्निकल ऑफिसर से सर्टिफिकेशन लिया जाए।
उन्होंने सेक्शन 4 पर भी आपत्ति जताई जो सरकार को नोटिफिकेशन से किसी भी फिनटेक कंपनी पर यह कानून लागू करने की ताकत देता है। उनके अनुसार बिना संसदीय मंजूरी के ऐसा नहीं होना चाहिए।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए कानून से पुराने मामलों में व्याख्या को लेकर दिक्कतें और मुकदमे बढ़ सकते हैं।
