सोलर आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम, पॉलिसिलिकॉन के लिए आएगी नई PLI स्कीम

नई दिल्ली, देश को सौर ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार अब सोलर पैनल के सबसे अहम कच्चे माल ‘पॉलिसिलिकॉन’ के लिए नई PLI स्कीम लाने की तैयारी कर रही है।

 

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय MNRE के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने सोमवार को CII के कार्यक्रम में इसका ऐलान किया। सरकार का लक्ष्य देश में 10 गीगावाट से अधिक क्षमता का पॉलिसिलिकॉन विनिर्माण संयंत्र स्थापित करना है। यह कदम 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के संकल्प का हिस्सा है।

 

*क्यों जरूरी है नई योजना?*

वर्तमान में भारत में सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता 200 GW से अधिक और सोलर सेल की क्षमता 32 GW से ज्यादा हो चुकी है। अगले एक साल में 100 GW अतिरिक्त सेल क्षमता भी शुरू होने वाली है।

 

लेकिन सप्लाई चेन की सबसे कमजोर कड़ी पॉलिसिलिकॉन है। सोलर पैनल का यह बुनियादी कच्चा माल भारत में अभी शून्य प्रतिशत बनता है। इसके लिए भारत पूरी तरह चीन के आयात पर निर्भर है। चीन वैश्विक पॉलिसिलिकॉन बाजार पर एकाधिकार रखता है, जिससे सौर परियोजनाओं पर आपूर्ति और कीमत का जोखिम बना रहता है।

 

*अलग से मिलेगी वित्तीय मदद*

सरकार पहले ही सोलर सेल और मॉड्यूल के लिए ₹24,000 करोड़ की PLI योजना दे चुकी है। नई योजना उस राशि से अलग होगी।

 

पॉलिसिलिकॉन उत्पादन जटिल प्रक्रिया है और इसमें भारी पूंजी के साथ ज्यादा बिजली चाहिए। नई स्टैंडअलोन PLI का उद्देश्य इन्हीं शुरुआती खर्चों और तकनीकी जोखिम को कम करना है ताकि बड़े औद्योगिक घराने इस क्षेत्र में निवेश करें।

 

सरकार का मानना है कि इस नीति से न सिर्फ सौर ऊर्जा क्षेत्र सुरक्षित होगा, बल्कि रिफाइंड पॉलिसिलिकॉन का इस्तेमाल देश के बढ़ते सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप उद्योग को मजबूत करने में भी होगा।

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