कुण्डलपुर में 9 अगस्त को भव्य मंगल कलश स्थापना समारोह का आयोजन

हटा/दमोह। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पूज्य बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की पावन सन्निधि में आयोजित धर्मसभा में निर्यापक मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि कुण्डलपुर के बड़े बाबा यूँ ही “बड़े बाबा” नहीं बने। महानता प्राप्त करने से पहले उन्होंने अपने जीवन में विनम्रता,लघुता और अथक पुरुषार्थ का आदर्श प्रस्तुत किया। जो व्यक्ति अपने भीतर जितना अधिक लघुता का भाव धारण करता है, उसके भीतर उतनी ही प्रभुता स्वतः प्रकट होने लगती है। मुनि श्री ने कहा कि भगवान आदिनाथ का जीवन प्रत्येक साधक के लिए प्रेरणा है।उन्होंने अपनी आत्मशक्ति को पहचानकर सीमित से असीम और सूक्ष्म से विराट बनने का मार्ग दिखाया। जैसे एक छोटा-सा बीज विशाल वृक्ष का रूप धारण करता है, उसी प्रकार साधना और पुरुषार्थ से आत्मा भी केवलज्ञान जैसी परम अवस्था को प्राप्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि पूज्य आचार्य गुरुवर भी बड़े बाबा के चरणों में आकर निरंतर आत्मिक उन्नति का अनुभव करते रहे। बड़े बाबा की भक्ति और साधना व्यक्ति के जीवन की बाधाओं को दूर कर उसे परमार्थ के पथ पर अग्रसर करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं के भाव, अनुशासन और समय पर शुद्ध वस्त्र धारण कर अभिषेक की तैयारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे दिव्य दृश्य देवों और गुरुवरों को भी आनंदित करते हैं तथा बड़े बाबा की महिमा निरंतर बढ़ती रहती है।धर्मसभा में मुनि श्री ने सेवा और स्वावलंबन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से कुण्डलपुर मेँ दयोदय गोशाला, हथकरघा श्रमदान और पूर्णायु संस्थान जैसे सेवा प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं।

वर्ष 2016 में पूज्य गुरुवर के आशीर्वाद से यह योजनायेँ प्रारंभ की गई उन्होंने कहा कि हथकरघा योजना आज ग्रामीण क्षेत्र मेँ आत्मनिर्भरता का सफल उदाहरण बन चुकी है। कुण्डलपुर और आसपास के लगभग 30 गांवों के करीब 350 परिवार इस योजना से जुड़े हैं। जिन क्षेत्रों में पहले रोजगार के साधन नहीं थे, वहाँ आज अनेक परिवार सम्मानपूर्वक आजीविका अर्जित कर अपनी जीविका चला रहे हैं। कई परिवार अपनी मेहनत से प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर लेते हैं।मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे श्रमदान केंद्र से हथकरघा निर्मित शुद्ध वस्त्र खरीदें। अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सात्विक वस्त्रों

से करना चाहिये।आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से ग्रामीण परिवारों की आजीविका को बल मिला है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, स्वावलंबन और समाज के उत्थान का माध्यम भी है।अंत में निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज ने मंगलकामना करते हुए कहा कि सभी श्रद्धालु भगवान आदिनाथ की आराधना कर अपने अशुभ कर्मों का क्षय करें, जीवन की बाधाओं को दूर करें और तीर्थंकरों द्वारा प्रदर्शित मोक्षमार्ग पर निरंतर अग्रसर हों। जिनशासन की प्रभावना निरंतर बढ़ती रहे तथा सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का संचार हो। उपरोक्त जानकारी राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्या वाणी एवं प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने देते हुए बताया 9 अगस्त रविवार को चातुर्मास कलश की स्थापना समारोह दोपहर 1:00 बजे से प्रारंभ होगा। कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सभी पदाधिकारी ने सभी श्रद्धालुओं से क्षेत्र पर पधारने की अपील की है।

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