भोपाल: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज को जोहार देते हुए प्रदेश सरकार की आदिवासी नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज केवल प्रकृति के बीच नहीं रहता, बल्कि प्रकृति को अपनी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानता है। जल, जंगल, जमीन, सामुदायिकता और अपनी संस्कृति आदिवासी समाज की पहचान हैं।
सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार एक ओर आदिवासी गौरव की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने वन अधिकार अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में दावों के निरस्त होने और आदिवासियों के अपने जंगल से बेदखल होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पेसा कानून लागू होने के बावजूद ग्राम सभाओं के वास्तविक अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं। आदिवासी युवाओं और महिलाओं की सुरक्षा तथा सम्मान को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा।
सिंघार ने 2027 की जनगणना में आदिवासी धर्म कोड के लिए अलग कॉलम की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराएं और जीवन मूल्य हैं, इसलिए उसकी अलग पहचान को जनगणना में दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों को केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, बल्कि जमीन का मालिकाना हक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और जल-जंगल-जमीन पर संवैधानिक अधिकार चाहिए। विश्व आदिवासी दिवस पर उन्होंने समाज से अपनी पहचान, भाषा, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
