जबलपुर: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वन भूमि में लोगों के द्वारा खेती किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन तथा वन विभाग के द्वारा वन भूमि में अतिक्रमण कर खेती किये जाने वालो को हटाये जाने के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गयी। रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति पेश की गयी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को रिपोर्ट पर रिज्वाइंडर पेश करने समय प्रदान प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 14 अगस्त को निर्धारित की है।
उमरिया निवासी राम लखन सेन की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि लोगों के द्वारा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले वन भूमि में अतिक्रमण कर खेती का कार्य किया जा रहा है। जिसके कारण वन्यजीवों की आवाजाही व दिनचर्या पर प्रभाव पडता है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वन विभाग तथा जिला प्रशासन को कार्यवाही कर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान वन विभाग तथा जिला प्रशासन को अतिक्रमण कर खेती करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किये थे। हाईकोर्ट में पेश की गयी रिपोर्ट में कहा गया कि अतिक्रमण कर खेती करने वालो पर कार्यवाही करते हुए उन्हे हटा दिया गया है। याचिकाकर्ता ने विरोध करते हुए कि अतिक्रमणकारी अभी भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाली वन भूमि में खेती कर रहे है। याचिकाकर्ता की तरफ स्टेट्स रिपोर्ट पर रिज्वाइडर पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता परिमल चतुर्वेदी ने पैरवी की।
