सतना : शहर में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का दावा करने वाले नगर निगम के दावों की धरातल पर हवा निकल रही है. वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की ओवरहॉलिंग और पानी की टंकियों की सफाई के बड़े-बड़े अभियानों के बावजूद वार्ड क्रमांक 5 के रहवासी दूषित जल पीने को मजबूर हैं. लाखों खर्च कर टंकियां दुरुस्त करने का दावा किया गया लेकिन स्थानीय नागरिकों के घरों तक अब भी बदबूदार और गंदा पानी ही पहुंच रहा है.
सफाई के दावों के बाद भी समस्या जस की तस बने रहने से निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. रहवासियों का कहना है कि यदि प्लांट और टंकियां वाकई साफ हैं, तो खराबी वितरण व्यवस्था में है. क्षेत्र में बिछी मुख्य पाइपलाइनों में लीकेज, नाली के भीतर से गुजरते क्षतिग्रस्त पाइप या क्रास-कनेक्शन के कारण दूषित पानी नलों तक खींच रहा है. निगम का अमला कागजी फाइलों में मेंटेनेंस पूरा दिखाकर इतिश्री कर रहा है, जबकि धरातल पर व्यवस्था ठप है
वार्ड वासियों का स्पष्ट कहना है कि दफ्तर में बैठकर शिकायत बंद करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी वार्ड 5 की पाइपलाइन और सप्लाई नेटवर्क की जांच करें. स्वच्छ पेयजल नागरिकों का बुनियादी अधिकार
