वॉशिंगटन, अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य राइली मूर ने एनजीओ, ट्रस्ट और धार्मिक संगठनों के विदेशी डोनेशन को नियंत्रित करने वाले फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) में भारत के प्रस्तावित संशोधनों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से भारत सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी के प्रबंधन पर नियंत्रण मिलने की आशंका है।
धार्मिक संस्थाओं और संपत्तियों पर नियंत्रण का मुद्दा
रिपब्लिकन सांसद मूर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि एफसीआरए नियमों में यह संशोधन ईसाई समुदाय पर बड़ा असर डाल सकता है। नए प्रस्तावित बिल के तहत किसी संगठन का पंजीकरण रद्द या समाप्त होने पर सरकार विदेशी योगदान और उससे निर्मित संपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी
सांसद ने कहा कि यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के आपसी रिश्तों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में हजारों एक्टिव एफसीआरए सर्टिफिकेट मौजूद हैं, जिन्हें लेकर यह नया कानूनी प्रावधान चर्चा में है।

