युवक को सीधे जेल भेजना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने तलब किया एसीपी को

इंदौर: मारपीट के एक मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना युवक को सीधे जेल भेजना इंदौर पुलिस को भारी पड़ गया. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई और अपने रिहाई आदेश के पालन में हुई देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए खजराना एसीपी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है. वहीं पुलिस कमिश्नर से भी जवाब मांगा है.
मामला खजराना थाना क्षेत्र का है, जहां पड़ोसी से विवाद के बाद पुलिस ने तवरेज नामक युवक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 के तहत गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया था.

जबकि नियमानुसार आरोपी को पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के समक्ष पेश किया जाना था. युवक की ओर से अधिवक्ता अमित सिसोदिया ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर सवाल उठाया कि पुलिस कमिश्नर को किसी आरोपी को सीधे जेल भेजने का वैधानिक अधिकार है या नहीं. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खजराना एसीपी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर पूछा कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत युवक को सीधे जेल भेजा और न्यायालय के रिहाई आदेश का तत्काल पालन क्यों नहीं किया.

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, आपको इंदौर में ड्यूटी करना है या नहीं हाईकोर्ट ने युवक की तत्काल रिहाई के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का समय पर पालन नहीं होने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब यह भी तय किया जाएगा कि बीएनएसएस की धारा 170 के तहत पुलिस कमिश्नर को किसी आरोपी को सीधे जेल भेजने का वैधानिक अधिकार है या नहीं. मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक थाने में न्यायालय के आदेशों के तत्काल पालन के लिए अलग सेल अथवा नामित कर्मचारी नियुक्त किया जाए. शासन की ओर से अदालत को आश्वस्त किया कि सभी थानों में इसके लिए अलग कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे, ताकि भविष्य में न्यायालय के आदेशों के पालन में किसी प्रकार की देरी न हो

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