बिना चश्मे या वीआर हेडसेट के दर्शक करेंगे जंगल सफारी और अंतरिक्ष की सैर

इंदौर: शहर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय चिड़ियाघर जल्द ही देश की एक अनूठी तकनीक का गवाह बनने जा रहा है. यहां स्थापित किया गया है 360 डिग्री इमर्सिव डोम बच्चों और बड़ों को बिना किसी वीआर हेडसेट या विशेष चश्मे के वर्चुअल दुनिया का ऐसा अनुभव देगा, मानो वे स्वयं उसी वातावरण का हिस्सा हों.पिछले एक सप्ताह से डोम की तकनीकी टेस्टिंग जारी है और यदि सभी परीक्षण सफल रहे तो इसे 15 अगस्त से पहले दर्शकों के लिए शुरू किए जाने की तैयारी है. डोम के निर्माण और तकनीकी समन्वय से जुड़े चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम यादव ने बताया कि इमर्सिव डोम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दर्शकों को अलग से कोई उपकरण पहनने की जरूरत नहीं पड़ती.

विशाल 360 डिग्री स्क्रीन, अत्याधुनिक प्रोजेक्शन सिस्टम और चारों ओर गूंजती 7.1 सराउंड साउंड तकनीक दर्शकों को ऐसा अनुभव कराती है कि वे खुद जंगल, समुद्र या अंतरिक्ष के बीच मौजूद हों. एक साथ कई लोग इस अनुभव का आनंद ले सकते हैं. उन्होंने बताया कि डोम के भीतर केवल दृश्य और ध्वनि ही नहीं, बल्कि कुछ दृश्यों के दौरान बैठने की व्यवस्था में भी कंपन (वाइब्रेशन) महसूस होगा। इससे हर दृश्य और अधिक वास्तविक प्रतीत होगा. यदि स्क्रीन पर जंगल सफारी दिखाई जाएगी तो दर्शकों को ऐसा लगेगा मानो वे स्वयं जंगल के बीच सफर कर रहे हों, वहीं अंतरिक्ष पर आधारित फिल्म के दौरान चारों ओर ग्रह, तारे और आकाशगंगाएं दिखाई देंगी, जिससे अंतरिक्ष में होने का एहसास होगा. चिड़ियाघर में तैयार हो रहा यह इमर्सिव डोम अत्याधुनिक 8के प्रोजेक्शन तकनीक, उच्च क्षमता वाले मीडिया सर्वर, ऑटोमैटिक कैलिब्रेशन सिस्टम और 360 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन से लैस है. इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षा को भी रोचक और अनुभवात्मक बनाना है. यहां वन्यजीव, पर्यावरण, अंतरिक्ष विज्ञान और अन्य शैक्षणिक विषयों पर आधारित विशेष फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी, ताकि बच्चे खेल-खेल में नई जानकारियां हासिल कर सकें.

देश का पहला सार्वजनिक अनुभव केंद्र
परियोजना से जुड़े चिड़ियाघर प्रभारी उत्तम यादव का कहना है कि इंदौर में तैयार हो रहा यह डोम संभवतः देश में अपनी तरह का पहला सार्वजनिक अनुभव केंद्र होगा, जहां दर्शकों को विश्वस्तरीय इमर्सिव तकनीक का अनुभव मिलेगा. चिड़ियाघर प्रभारी के अनुसार, टेस्टिंग अंतिम चरण में है. तकनीकी टीम प्रत्येक दृश्य, ध्वनि और विशेष प्रभावों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि उद्घाटन के बाद दर्शकों को निर्बाध और रोमांचक अनुभव मिल सके. यदि निर्धारित समय पर सभी तैयारियां पूरी हो जाती हैं तो स्वतंत्रता दिवस से पहले इंदौरवासियों को इस नई तकनीक का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा.

क्या है इमर्सिव डोम?
इमर्सिव डोम एक गोलाकार थिएटर होता है, जिसकी पूरी छत और दीवारें प्रोजेक्शन स्क्रीन का काम करती हैं. 360 डिग्री प्रोजेक्शन, उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि और विशेष दृश्य प्रभावों के कारण दर्शक स्वयं को फिल्म या दृश्य का हिस्सा महसूस करते हैं. यही वजह है कि इस तकनीक को भविष्य के मनोरंजन और अनुभवात्मक शिक्षा का नया आयाम माना जा रहा है.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), संवर्धित वास्तविकता (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ इमर्सिव डोम भविष्य की शिक्षा और मनोरंजन का महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगे.

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