अच्युतानंदन, धर्मेंद्र समेत पांच हस्तियों को पद्म विभूषण

नयी दिल्ली, 25 जनवरी (वार्ता) केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मार्क्सवादी नेता वी.एस. अच्युतानंदन तथा जाने-माने फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत करने के लिए चुना गया है। इनके अलावा तीन और हस्तियों को भी पद्म विभूषण से सम्मानित किया जायेगा।

सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने की घोषणा की है।

श्री अच्युतानंदन और श्री धर्मेंद्र के अलावा इस सूची में प्रख्यात न्यायविद न्यायमूर्ति के. टी. थॉमस, मलयालम साहित्यकार पी. नारायणन और उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली विश्व प्रसिद्ध वायलिन वादक एन. राजम भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति थॉमस तथा श्री नारायणन केरल से हैं।

अक्टूबर 1923 में जन्मे श्री अच्युतानंदन को उनकी जन-हितैषी राजनीति के लिए जाना जाता रहा है। वह 2006 से 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे। सार्वजनिक मामलों में उनका पूरा जीवन आम आदमी के अधिकारों की लड़ाई लड़ने में बीता। एक कट्टर सिद्धांतवादी नेता के रूप में, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण आंदोलन किये। पिछले साल 21 जुलाई को 101 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था।

भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ के रूप में विख्यात धर्मेंद्र का कला के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने छह दशकों से अधिक के अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’ और ‘सत्यकाम’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने न केवल अभिनय की विविधता पेश की, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। उनका 89 वर्ष की उम्र में पिछले साल 24 नवंबर को देहावसान हो गया था।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. टी. थॉमस सार्वजनिक मामलों और न्याय व्यवस्था में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने कई ऐतिहासिक और साहसिक फैसले सुनाए जिन्होंने देश की कानूनी दिशा को प्रभावित किया। न्याय के प्रति उनकी निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में एक सम्मानित स्थान दिलाया है। वह कानून की जटिलताओं को सुलझाने और न्याय प्रणाली में सुधार के कट्टर समर्थक हैं।

डॉ. एन. राजम का नाम शास्त्रीय संगीत की दुनिया में सम्मानपूर्वक लिया जाता है। वायलिन वादन में ‘गायन अंग’ (वायलिन पर गायकी का प्रभाव उत्पन्न करना) की कला को विकसित करने का श्रेय उन्हें ही जाता है। उत्तर प्रदेश से जुड़ीं इस महान कलाकार ने अपनी उंगलियों के जादू से वायलिन को भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक नया दर्जा दिलाया है। शिक्षा और कला के मिश्रण के साथ उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भी अपना बहुमूल्य योगदान दिया है।

साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में श्री नारायणन का योगदान समाज की बौद्धिक प्रगति का आधार रहा है। उन्होंने अपनी लेखनी और शैक्षिक कार्यों के माध्यम से न केवल क्षेत्रीय भाषा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ज्ञान का प्रसार किया। शिक्षा को सुलभ बनाने और साहित्य के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करने में भी उनका अहम योगदान रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी के बीच वैचारिक चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

 

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