
जबलपुर। प्रदेश सरकार में मंत्री गोविंद सिंह के द्वारा अपने चुनावी नामांकन में सौ करोड़ रुपये की संपत्ति की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में राहत चाही गयी थी कि संपत्ति संपत्ति के संबंध में गलत जानकारी देने के कारण उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाये। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये है।
याचिकाकर्ता राजकुमार पटेल की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उन्होने सुरखी विधानसभा सीट ने नामांकन दाखिल किया था। उनके नामांकन को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद वह एक आपराधिक प्रकरण में जेल में निरुद्ध हो गये। जिसके कारण वह भाजपा प्रत्याशी गोविंद सिंह के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर नहीं कर सके।
याचिका में कहा गया था कि निर्वाचित विधायक गोविन्द सिंह ने अपने नामांकन में पत्नी व अन्य परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज लगभग सौ करोड की भूमि की जानकारी अपने चुनावी हलफनामा में नही दी गयी है। अनावेदक विधायक की तरफ से हाईकोर्ट में प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि उक्त भूमि सरकारी दस्तावेज में शिक्षा समिति के नाम पर दर्ज है, जिसकी अध्यक्ष उनकी पत्नी है। उनके भतीजे की तरफ से भी न्यायालय को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने उसकी निजी भूमि को अनावेदक की बताई है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये है।
