
भोपाल। आवासीय क्षेत्रों में भू-उपयोग और भवन नियमों के कथित उल्लंघन कर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ भोपाल नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं।
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने न्यायमूर्ति अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ को बताया कि रहवासियों की शिकायत है कि कुछ सील किए गए परिसर दिन में बंद रहने के बाद रात में फिर खुल जाते हैं। न्यायालय को पहले यह भी बताया गया था कि करीब 1,000 नोटिस जारी किए गए और लगभग 100 ऐसे परिसरों की सील बाद में हटा दी गई, जिन्हें पहले सील किया गया था।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि कार्रवाई केवल सील किए गए परिसरों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक भू-उपयोग, स्वीकृत भवन मानचित्र और प्रत्येक संपत्ति की कानूनी स्थिति के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई के साथ छोटे व्यापारियों को अनुचित रूप से निशाना नहीं बनाने की मांग की।
मध्यप्रदेश सरकार ने न्यायालय को सीलिंग कार्रवाई में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करने का आश्वासन दिया है। 15 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई स्थगित हो गई थी और मामले की आगे सुनवाई होनी है।
