वाराणसी, 4 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने बुधवार को कहा कि सारनाथ के यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और यह पूरी दुनिया के बौद्ध समुदाय के लिए गौरव का विषय है।
श्री शेखावत ने सारनाथ पहुंचकर ऐतिहासिक धरोहरों एवं स्तूप परिसर का निरीक्षण किया। उनके साथ श्री विशाल वी. शर्मा, राजदूत / स्थायी प्रतिनिधि, भारत, यूनेस्को भी उपस्थित रहे। राजदूत श्री शर्मा ने सारनाथ में उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों के साथ बैठक की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में किसी स्थल को शामिल कराने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल होती है, जिसमें कई तकनीकी मानकों और विशेषज्ञ समितियों की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिली है तथा यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर है।
उन्होंने कहा कि सारनाथ के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद अब इसकी जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि काशी के प्रत्येक नागरिक की भी है। उन्होंने लोगों से हवाई अड्डे, गंगा घाटों, सड़कों और गलियों को स्वच्छ रखने की अपील करते हुए कहा कि यहां आने वाला प्रत्येक पर्यटक सुखद अनुभव लेकर लौटे।
श्री शर्मा ने यूनेस्को विश्व धरोहर संधि के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थल के संरक्षण एवं प्रबंधन को सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और भारत इसका संस्थापक सदस्य है।
