ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लगभग तीन वर्षों से निलंबित चल रहे एक शासकीय कर्मचारी के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अशोकनगर कलेक्टर को उसके निलंबन की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के नियमानुसार निलंबन आदेश को अनिश्चितकाल तक नहीं खींचा जा सकता।
नियमों की अनदेखी पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रेखांकित किया कि राज्य शासन के 28 जनवरी 2013 के स्पष्ट परिपत्र (सर्कुलर) के अनुसार, किसी भी निलंबित कर्मचारी के प्रकरण में हर छह महीने (प्रत्येक छमाही) में निलंबन की समीक्षा किया जाना अनिवार्य है। इस मामले में तीन साल बीत जाने के बावजूद नियमित समीक्षा न होना प्रशासनिक नियमों के विपरीत है।
क्या था मामला?
संबंधित शासकीय कर्मचारी पिछले करीब तीन साल से बिना किसी ठोस निष्कर्ष या त्वरित निराकरण के निलंबन की कार्रवाई झेल रहा था। समय पर विभागीय जांच पूरी न होने और समीक्षा के प्रावधानों का पालन न किए जाने पर कर्मचारी ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अशोकनगर कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वे तय समयसीमा के भीतर नियमानुसार कर्मचारी के निलंबन की पुनः समीक्षा कर उचित निर्णय लें।
