नई दिल्ली, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक जमा (डिपॉजिट) पर मिलने वाले ब्याज और उससे जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन नए प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाना और सभी ग्राहकों के साथ एकसमान व्यवहार सुनिश्चित करना है, जो आगामी 1 अक्टूबर से देश भर के सभी अनुसूचित बैंकों पर लागू हो जाएंगे।
ब्याज दरों की जानकारी और समय सीमा
नए दिशा-निर्देशों के तहत, सभी कमर्शियल, स्मॉल फाइनेंस, रीजनल रूरल और पेमेंट बैंकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हर कामकाजी दिन सुबह 10:10 बजे तक सभी प्रकार की जमा राशि पर लागू ब्याज दरों को अनिवार्य रूप से प्रकाशित करना होगा। बैंकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश की सभी शाखाओं में एक ही श्रेणी के जमाकर्ताओं के लिए ब्याज दरें एक समान हों।
बैंकों को मिला ऑपरेशनल लचीलापन
केंद्रीय बैंक ने बल्क डिपॉजिट और होलसेल फंडिंग के मामले में बैंकों को लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (LCR) फ्रेमवर्क के तहत दरों तय करने की अनुमति दी है। हालांकि, इन नए नियमों से एफडी की ब्याज दरों में तत्काल कोई फेरबदल होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन इससे ग्राहकों को अधिक स्पष्टता और बैंकों को बेहतर वित्तीय प्रबंधन में मदद मिलेगी।

