व्यावरा: समीपस्थ ग्राम भगवतीपुर की 75 वर्षीय वृद्धा हरकूबाई गौड़ ने बुढ़ापे के मुख को चिंता किये बिना अपनी सारी संपत्ति गांव के दो मंदिरों को दान कर दी. इसके लिये उन्होंने गांव की पंचायत बुलाई और सभी प्रमुख गांववासियों के सामने अपने पास की करीब 20 लाख रूपये की नगदी राशि मंदिर में दान करने की घोषणा की.
उल्लेखनीय कि हरवाई गौड़ ग्राम भगवतीपुर की बेटी है. उनका विवाह ब्यावरा तहसील के ग्राम बारवा निवासी जगदीश गौड़ के साथ हुआ था. करीब 25 वर्ष पूर्व हरकूबाई गौड़ का अपने पति से अलगाव हो गया था. इसके बाद से वे अपने पिता के पास ग्राम
भगवतीपुर आ गई थी.
हरकूबाई धार्मिक प्रवृत्ति की महिला है. उनके एक पुत्री है जिसका बहुत पहले विवाह हो चुका है. वृद्धा स्वाभिमानी महिला है. उसकी पुत्री ने भी उसका प्यान नहीं रखने के कारण वृद्धा ने सभी से अपना रिश्ता तोड़ लिया था. अंततः उसने अपनी संपति के रूप में मौजूद नगद राशि करीब 20 लाख रूपये को उसने गांव के दो मंदिरों में दान करने का निर्णय
ब्यावरा राशि मंदिर के लिए दान करते हुए हरकूबाई.
गांव में कथा कराने के बाद करीब 20 लाख दान किए
वृद्धा हरकूबाई ने विगत दिवस ग्राम भगकतीपुर में रात्रि देवनारायण मंदिर पर कथा कराई और कहां गांव के सभी समाज के परिजनों को आमंत्रि किया. उन्होंने सभी के समक्ष यह घोषणा की कि गांव के दो देव स्थलों हनुमान मंदिर और देवमहारान के स्थान के विकास के
लिये 9.55 लाख 9.55 लाख रुपये दान कर दिये. उन्होंने नोटो से भरे झोले को निकालकर उसमें से दो मंदिरों में बराबर की राशि दान करने की घाषणा की. इस अवसर पर गांव के पटेल इंदर सिंह गुर्जर, सरपंच नारायण सिंह गुर्जर, पूर्व सरपंच मानसिंह मीणा, पूर्व सरपंच रंगलाल दांगी, गांव के वरिश रंगलाल दांगी, मोर सिंह जाटव, सर्जन सिंह गुर्जर आदि कई लोग मौजूद थे
बेसहारा वृद्धा को किसी से कोई अपेक्षा नहीं
बेसहा वृद्धा हरकूबाई गौड़ को किसी से कोई अपेक्षा नहीं है. न तो उन्हें मुद्दापे के मुख की चिंता है और न किसी प्रकार के वैभव विलासिता से कोई मतलब है. अपनी जमीन से प्राप्त हुई राशि को दोनो मंदिरों में बराबर बांट कर उन्होंने अपने पास एक रूपये भी नहीं रखे. वृद्धा के परिवारजन समीप ही रहते हैं. उन्होंने अंतिम समय तक उनके देखरेख का भरोसा जताने के बाद उन्होंने अपने पास की नगदी राशि को मंदिर में दान कर दिये. उन्होंने गांव की पंचायत के समक्ष किसी प्रकार की कोई अपेक्षा परिवारजन से नहीं की. उन्होंने मंदिर में पहले कथा कराई, प्रसाद बांटी, पूजा अर्चना की और अपनी नगद राशि सभी के समक्ष दोनों मंदिरों में समान रूप से दान कर दी. वृद्धा का ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा भरोसा और विश्वास को देखते हुए सभी ग्रामीणजनों, परिवारजनों ने उनको प्रशंसा की और उनके जीवन पर्यंत सभी ने उनका ध्यान रखने का भरोसा दिलाया
