
छिंदवाड़ा. जिले के विकासखंड तामिया का दूरस्थ ग्राम चिमटीपुर कभी पेयजल संकट से जूझता था। यहां के ग्रामीणों विशेषकर बच्चों और छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजाना कई किलोमीटर दूर पानी लाने जाना पड़ता था। पढ़ाई में बाधा आने के साथ ही गांव की महिलाओं और बच्चियों को भी पानी की तलाश में कठिनाई झेलनी पड़ती थी। लेकिन अब ग्रामीणों को पानी के लिए कई किलोमीटर दूर नही जाना होगा। क्यों कि चिमटीपुर में सौर ऊर्जा से संचालित नलकूप पानी उगल रहा है जिससे ग्रामीणों की पानी की समस्या का समानाध हो गया है. पानी मिलने से ग्रामीणों के चहरों में खुशी देखी जा रही है. बता दे कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग परासिया के क्षेत्र अंतर्गत, जल जीवन मिशन की महत्वाकांक्षी योजना, जो कई वर्षों से यहां परंपरागत विद्युत संयोजन के अभाव के कारण रुकी हुई थी. लेकिन अब यह योजना साकार हो गई है। केंद्र एवं राज्य शासन की जल एवं अक्षय ऊर्जा से संबंधित योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा गत वर्ष एक नवाचारी पहल की गई और गांव में सौर ऊर्जा संचालित नलकूप में पंप लगा दिया जिससे नलकूप पानी उगल रहा है और ग्रामीणों कों स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है.
हर घर में पहुंच रहा नल का पानी ००००००
ग्राम चिमटीपुर क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत हर घर पेयजल प्रदाय योजना का जमीनी स्पर पर क्रियान्वयन किया जा रहा है . इस पहल के बाद से गांव के हर घर में नल से पानी पहुंच रहा है और हर घर जल का सपना हकीकत बन चुका है। अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई छोड़कर पानी ढोने नहीं जाना पड़ता और महिलाओं को भी दिनभर दूर स्थित कुएं-बावड़ी की दौड़ से मुक्ति मिल गई है।
अब नही होगा बीमारी का खतरा ०००००
गांव की स्कूली छात्रा कुमारी मनिता उइके बताती है कि पहले उन्हें पानी के लिए बहुत दूर जाना पड़ता था, जिससे पढ़ाई भी छूट जाती थी, अब घर पर ही पानी मिल जाता है, हमारी बहुत परेशानी दूर हो गई है. वहीं गांव की महिला प्रमिला उइके कहती हैं पहले वे लोग दूर स्थित कुएं से पानी लाते थे, पानी स्वच्छ नही होने से कई बार बीमारी फैल जाती थी, लेकिन अब नल से साफ पानी आने लगा है जिससे बीमारी का खतरा नहीं है.
होम स्टे में नलकूप से स्वच्छ पानी उपलब्ध ०००००
ग्राम में विकसित आंवला होमस्टे के संचालक रूपलाल के द्वारा बताया कि ग्राम में विकसित होमस्टे में नलकूप से स्वच्छ पानी उपलब्ध होने से पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिली है।सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण ग्रामीणों को पेयजल के लिए बिजली बिल भी नहीं देना पड़ता है.
