जबलपुर: पुलिसिंग को हाईटेक और पारदर्शी बनाने के दावों की जमीनी हकीकत मध्यप्रदेश पुलिस का सिटीजन पोर्टल कुछ और ही बयां कर रहा है। दरअसल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिकों के लिए सीसीटीएनएस पोर्टल विकसित किया गया है। यह सीसीटीएनएस भारत सरकार का एक मिशन मोड प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत प्रदेश के सभी पुलिस स्टेशन और वरिष्ठ पुलिस कार्यालयों को कम्प्यूटराईज्ड किया जाकर पूरे देश में जोडा गया है। जिसमें घर बैठे ई- एफआईआर दर्ज करने के साथ एफआईआर देख सकते है लेकिन मध्य प्रदेश गृह विभाग अंतर्गत स्टेट क्राइम रिकॉड्र्स ब्यूरो की वेबसाइट में जबलपुर के थानों में दर्ज होने वाली एफआईआर को 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक करने के कड़े आदेशों को ठेंगा दिखा जा रहा है।
\आलम यह है कि केस दर्ज होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर को ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जा रहा है। जबकि प्रदेशभर के थानों को सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) से जोड़ा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को त्वरित न्याय और पारदर्शिता देना है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश पुलिस के आधिकारिक सिटीजन पोर्टल पर जिले किसी भी थाने में कई दिनों से पिछले 24 से 48 घंटों में दर्ज हुई एफआईआर नजर नहीं आ रही हैं। पुलिस की इस सुस्ती ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं अपराध पर पर्दा डालने तो क्राइम डेटा नहीं छिपाया जा रहा। जबकि थानों के चक्कर काटने से बचाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई थी लेकिन एफआईआर समय पर ऑनलाइन न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी पीडि़तों को उठानी पड़ रही है।
ऐसे चला पता नहीं अपलोड हो रही एफआईआर
नवभारत ने रविवार रात्रि 8 बजे तक पड़ताल की तो पता चला कि शहर से लेकर ग्रामीण अंचल के किसी भी थाने में दर्ज एफआईआर पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड नहीं हो रही है। पड़ताल के दौरान पता चला कि 20 जुलाई तक पोर्टल पर दर्ज अपराध दर्ज किए गए थे 21 जुलाई से 2 अगस्त रात्रि 8 बजे तक कोई भी कायमी दर्ज नहीं हुई थी। हालांकि केवल एक्सीडेंट के मामले जरूर नजर आ रहे थे। जानकार बताते है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इस पोर्टल पर प्रतिदिन नहीं हफ्ते या फिर 15 दिन बाद एक साथ सारी एफआईआर अपलोड कर दी जाती थी।
कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा रहा
जानकारों की माने तो संवेदनशील मामलों (जैसे पोक्सो एक्ट, दुष्कर्म या राष्ट्रीय सुरक्षा) को छोडक़र सभी सामान्य मामलों की एफआईआर सार्वजनिक करना अनिवार्य है। ऐसे में कई दिनों तक एफआईआर पोर्टल पर न दिखने से अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा रहा है। चर्चा है कि मामले को दबाने के लिए एफआईआर को जानबूझकर देरी से अपलोड किया जाता है।
पोर्टल में ये सुविधाएं भी है उपलब्ध
मध्य प्रदेश पुलिस का सिटिजऩ पोर्टल नागरिकों की सुवधिाएं के लिए घर बैठे ई एफआईआर के साथ दर्ज एफआईआर देखने के अलावा सभी पुलिस अधिकारी आपस में एक दूसरे के सम्पर्क में आकर कार्य कर सकते है एवं अपराध व अपराधियों की जानकारी का तत्काल आदान प्रदान कर सकते है। इसके अलावा आम नागरिक गुम सम्पत्ति जैसे मोबाइल फोन, सिम कार्ड , दस्तावेज इत्यादि की सूचना पुलिस को दे सकते है, पावती प्राप्त कर सकते है। आम नागरिक किसी घटना, संदिग्ध गतिविधि की जानकारी आसानी से बिना अपनी पहचान बताये पुलिस को दे सकते है। आम नागरिक पुलिस के साथ सतत संवाद, कर फीड बैक दे सकते है। आम नागरिक के लिए गुम इंसान, अज्ञात मृत शव से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध है। आम नागरिक के लिए चोरी गए वाहनो, पुलिस द्वारा बरामद, जप्त वाहनों में खोज की सुविधा इंजिन नं./ चेंसीस नं./रजिस्ट्रेशन नं. के आधार पर पोर्टल में उपलब्ध है। राष्ट्रीय स्तर की सेवाओं के लिए डिजिटल पुलिस नागरिक सेवाएँ पोर्टल भी उपलब्ध है।
कॉल नहीं हुआ रिसीव
यह वेबसाइट मध्य प्रदेश के गृह विभाग के अंतर्गत स्टेट क्राइम रिकॉड्र्स ब्यूरो की है। सेवाओं से जुड़ी किसी भी परेशानी के मामले में इस वेबसाइट पर मोबाइल नंबर 0755-3501600 दिया हुआ था जब जबलपुर थानों में दर्ज एफआईअ ार दर्ज न होने कारण जानने के लिए इस नंबर पर कॉल किया गया तो कॉल रिसीव नहीं किया गया।
