नई दिल्ली, 01 अगस्त (वार्ता) कोल एम्प्लॉइज फोरम ने केंद्र सरकार और कोयला मंत्रालय से कोयला खदान परिवार पेंशन योजना (सीएमपीएफएस-1971) तथा कोयला खदान पेंशन स्कीम (सीएमपीएस-1998) के अंतर्गत आने वाले सेवानिवृत्त कोयला कर्मियों के लिए न्यूनतम मासिक पेंशन 10,000 रुपये किए जाने जाने , पेंशन को औद्योगिक श्रमिक महंगाई भत्ता (आईडीए) के साथ जोड़ने तथा चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की मांग की है।
शनिवार को राजधानी में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कोल एम्प्लॉइज फोरम के अध्यक्ष बिमन मित्रा, संयुक्त महासचिव मोऊ मुखर्जी, महासचिव चंचल बनर्जी तथा कार्यकारिणी सदस्य लक्ष्मण कालवाला ने कहा कि वर्तमान में, 21,000 पेंशनभोगियों को 1,000 रुपये से भी कम मासिक पेंशन मिल रही है।
उन्होंने कहा कि दशकों से इन पेंशन राशियों में कोई उल्लेखनीय संशोधन नहीं हुआ है और इन्हें आईडीए से नहीं जोड़ा गया है, जबकि अन्य कई सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों की पेंशन योजनाओं में महंगाई के अनुरूप संशोधन की व्यवस्था है।
संगठन के अनुसार, कोल इंडिया के लगभग 6 लाख पेंशनभोगी एवं पारिवारिक पेंशनभोगी हैं, जिनमें से करीब 4.76 लाख वर्तमान में पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही दावा किया गया कि लगभग 47,000 पेंशनभोगियों की पेंशन जीवन प्रमाण पत्र जमा न करने, जागरूकता की कमी तथा प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण बंद हो गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि चार लाख से अधिक सेवानिवृत्त कोयला कर्मियों के पास कोल इंडिया का मेडिकल कार्ड नहीं है, जिससे उन्हें उपचार कराने में कठिनाई होती है। उन्होंने विशेष रूप से 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनभोगियों को आयुष्मान भारत अथवा इसी प्रकार की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के दायरे में लाने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों और विधवा पेंशनभोगियों के लिए सुलभ चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की।
