उज्जैन: वर्षों तक धर्म और पर्यटन की पहचान रखने वाली महाकाल की नगरी अब तेजी से उद्योग नगरी के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रही है. कभी रोजगार के अभाव में जहां युवाओं को पलायन करना पड़ता था, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था और एक-एक कर पुरानी औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई थीं, वहीं आज विक्रम उद्योगपुरी उज्जैन की तस्वीर बदल रही है. देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां निवेश कर रही हैं और हजारों करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाएं धरातल पर उतर रही हैं.
विक्रम उद्योगपुरी में वर्तमान में 67 से अधिक बड़े उद्योग निर्माण और स्थापना के विभिन्न चरणों में हैं. इनमें सैकड़ों करोड़ से लेकर हजारों करोड़ रुपये तक के निवेश वाली परियोजनाएं शामिल हैं. औद्योगिक विकास के साथ-साथ एयरपोर्ट, हेलीपैड, फोरलेन, सिक्सलेन, टूलेन सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी ने उज्जैन को निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है.
गांव वालों ने किराए पर दिए मकान
उद्योगों के आने से आसपास के गांवों की आर्थिक स्थिति भी तेजी से बदल रही है. ग्रामीण अपने मकान किराए पर देकर आय अर्जित कर रहे हैं. उद्योगों में कार्यरत कर्मचारी आसपास रह रहे हैं, जिससे नई आवासीय कॉलोनियां विकसित हो रही हैं. निजी स्तर पर दो से तीन नई कॉलोनियां भी बस चुकी हैं. स्थानीय बाजारों में व्यापार बढ़ा है और रोजगार के नए अवसर लगातार पैदा हो रहे हैं.
विक्रम उद्योगपुरी पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को विक्रम उद्योगपुरी का निरीक्षण कर औद्योगिक विकास की प्रगति का जायजा लिया. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि उद्योगों में स्थानीय किसानों और ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए. साथ ही किसानों को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि उनकी आय भी बढ़े और उद्योगों को स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध हो सके.
वूमेन हॉस्टल को देखा
मुख्यमंत्री ने लगभग 50.05 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे वर्किंग वूमेन हॉस्टल का भी निरीक्षण किया, सात ब्लॉकों में विकसित इस आधुनिक आवासीय परिसर में लगभग 1500 महिला कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था होगी. यहां सुरक्षित आवास के साथ बच्चों की शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर आवासीय सुविधाओं से महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ेगी और महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी.
फैक्ट्री की बाढ़,जमीन खत्म हो गई
नवभारत से चर्चा में एमपीआईडीसी के कार्यपालक निदेशक राजेश राठौड़ ने बताया कि विक्रम उद्योगपुरी के पहले चरण की पूरी जमीन निवेशकों को आवंटित की जा चुकी है और वहां नई औद्योगिक इकाइयों का संचालन भी शुरू हो गया है. उद्योगों की बढ़ती मांग को देखते हुए अब दूसरे चरण की तैयारी तेज कर दी गई है. सात गांवों की भूमि अधिग्रहित कर फेज-2 विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों की लंबी कतार लगी हुई है और ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से उद्योगपति लगातार जमीन बुक कर रहे हैं.
पेप्सीको पहुंचे मुख्यमंत्री
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने पेप्सिको इंडिया लिमिटेड की लगभग 1,266 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई का भी अवलोकन किया. इस परियोजना से लगभग 800 प्रत्यक्ष और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
94 भूखंड आवंटित किए
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में जिले में 246 नई औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की गई है, जिनसे लगभग 16,150 करोड़ रुपये के निवेश और 14,500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार की संभावना है. लगभग 773 एकड़ में विकसित विक्रम उद्योगपुरी में अब तक 94 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं, जिनसे लगभग 6,480 करोड़ रुपये का निवेश होगा.
मेडिकल डिवाइस पार्क
360 एकड़ में विकसित मेडिकल डिवाइस पार्क में 74 उद्योगों को भूमि आवंटित की जा चुकी है, जहां लगभग 2,894 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. वहीं 488 हेक्टेयर में विकसित हो रहे विक्रम उद्योगपुरी फेज-2 में अल्केम लेबोरेट्रीज़, अडानी समूह और वॉल्वो आयशर जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है. इन परियोजनाओं से लगभग 4,800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जबकि 35 से अधिक अन्य उद्योगों ने 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं.
आईटी पार्क का प्रथम चरण
इसके अलावा निर्माणाधीन आईटी पार्क का प्रथम चरण पूरा हो चुका है. वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में बेस्ट लाइफ कॉर्पोरेशन और प्रतिभा स्वराज लिमिटेड द्वारा 315 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जिससे 5,000 से अधिक लोगों, विशेषकर महिलाओं, को रोजगार मिलेगा.
