जबलपुर: पास्को एक्ट में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि एक्स-रे रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित बालिग है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को दोषमुक्त कर दिया।
बालाघाट जिले के कटंगी निवासी आयुष उर्फ लकी की तरफ से पास्को एक्ट के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील में कहा गया था कि पीड़ित को परिजन डांटते थे,जिसके कारण उसने अपना घर छोड दिया था। अपीलकर्ता से संपर्क होने पर उसने पीड़ित को घर वापस जाने के लिए कहा था। पीड़ित द्वारा तैयार नही होने पर उसने पीड़ित को अपने दोस्त के साथ उसके घर भेज दिया था। दोस्त के परिजनों ने भी पीड़ित को वापस घर लौटने के लिए कहा था। इसके बाद पीड़ित ने दूसरे दिन बिना बताये दोस्त का घर छोड दिया और उससे संपर्क किया। इसके बाद दोनों नागपुर होते हुए हैदराबाद व बैंगलोर पहुॅचे। कंटगी पुलिस ने उन्हें 30 जुलाई को बैंगलौर से बरामद किया था।
युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि मेडिकल जांच के दौरान पीडिता का एक्स-रे किया गया था। एक्स-रे रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित की उम्र 18 साल से अधिक है। रिपोर्ट के रिकॉर्ड में होने के बावजूद भी ट्रायल कोर्ट ने उस पर विचार नही किया। स्कूल रिकॉर्ड में पीडित की जन्म तिथि 19 दिसंबर, 2003 दर्ज है। पीड़िता की जन्म तिथि किस आधार पर दर्ज की गई,इसका कोई उल्लेख व दस्तावेज नही है। पीडित ने मजिस्ट्रेट बयान में अपीलकर्ता के खिलाफ एक षब्द भी नही कहा है। मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान को बाद में केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि पीड़िता दबाव या डर में थी, जब तक कि इसका कोई सबूत न हो। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को दोषमुक्त कर दिया
