वाशिंगटन, 29 जुलाई (वार्ता) अमरीका के पूर्व शीर्ष महामारी विशेषज्ञ एंथनी फाउची ने बुधवार को संसद की समिति के सामने कोविड-19 महामारी से जुड़े सवालों के जवाब देने से साफ इनकार कर दिया।
श्री फाउची ने सुनवाई के दौरान कहा, “संसद के प्रति मेरे मन में गहरा सम्मान है और उनके साथ सहयोग करने का मेरा दशकों पुराना रिकॉर्ड रहा है। लेकिन अपने वकीलों की सलाह पर, संविधान के पांचवें संशोधन के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मैं आपके सवालों के जवाब देने से इनकार करता हूँ।”
इस पर सांसद रैंड पॉल ने कहा कि समिति इस बात पर विचार करेगी कि श्री फाउची के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाये, क्योंकि संसदीय जांच में गवाही देने से इनकार करना कानून का उल्लंघन हो सकता है।
अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन का सहारा लेना अपराध स्वीकार करना नहीं माना जाता। यह प्रावधान नागरिकों को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर किए जाने और गलत आरोपों से सुरक्षा देता है।
श्री फाउची ने याद दिलाया कि वह पहले भी कई संसदीय समितियों के सामने गवाही दे चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री पॉल की उन्हें सजा दिलाने की ‘ज़िद और सनक’ की वजह से ही उन्होंने इस बार सवालों का जवाब न देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “मुझे इस समिति के सामने बुलाने का उनका एकमात्र मकसद मुझसे कुछ भी ऐसा कहलवाना है, जिससे उनकी उस पुरानी बात को सही साबित किया जा सके कि मुझे जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए।”
फरवरी 2020 की एक डायरी में श्री फाउची ने लिखा था कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों में एकमत नहीं था। उस समय राष्ट्रीय एलर्जी एवं संक्रामक रोग संस्थान के प्रमुख रहे फाउची का मानना था कि वायरस के जानवरों से इंसानों में प्राकृतिक रूप से फैलने की संभावना अधिक है। हालांकि, उन्होंने प्रयोगशाला से वायरस लीक होने की आशंका को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया। उन्होंने लिखा, “दो संभावनाएं होने का यह मतलब नहीं कि दोनों की संभावना बराबर हो।”
इसी बीच, अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोरोना महामारी से निपटने के तरीकों और हर जगह मास्क पहनने की श्री फाउची की सलाह पर कड़ी आपत्ति जतायी। श्री ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैंने इस मामले में श्री फाउची की बात नहीं मानी थी। उनके विचार बिल्कुल अजीब थे।”
इस साल जून में राष्ट्रीय खुफिया विभाग की तत्कालीन प्रमुख तुलसी गबार्ड ने पद छोड़ने से पहले श्री फाउची से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किये। इनमें चीन की वुहान प्रयोगशाला को मिले शोध अनुदान से जुड़े दस्तावेज भी शामिल थे।
वहीं, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले फाउची को संभावित कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए अग्रिम क्षमादान दे दिया था।
