अनूपपुर के ग्रामीण कीचड़ में फंसे, बीमारों को कांवर में ले जाना मजबूरी

अनूपपुर। 70 वर्षों की आजादी के बाद भी अनूपपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में विकास की सड़क अब भी दलदल में धंसी हुई है। जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ अंतर्गत ग्राम मोहंदी से होकर गुजरने वाला हर्रई से बेलघाट मार्ग हर साल बरसात में कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे न वाहन जा पाते हैं और न ही पैदल चल पाना संभव होता है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब बनती है जब बीमारों को इलाज के लिए कांवर में उठाकर ले जाना पड़ता है।

तीन गांवों की जिंदगी हर साल बरसात में थम जाती है

हर्रई से बेलघाट तक का यह रास्ता रैगड़ियाटोला, खोलटोला और नवाटोला जैसे गांवों को जोड़ता है, जिनकी आबादी 1000 से अधिक है। यहां 105 परिवारों की जिन्दगी बरसात के चार महीनों में घरों में कैद हो जाती है। रास्ते पर गाड़ियों का तो सवाल ही नहीं, लोग बाइकें गांव से 3 किलोमीटर दूर छोड़कर कीचड़ में पैदल चलते हैं।

स्कूल, अस्पताल और बाजार पहुंचना बना चुनौती

गांव के बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते, बुजुर्गों और बीमारों की हालत और भी बदतर होती है। स्थानीय ग्रामीण ईश्वर नायक और गया राम सिंह ने बताया कि गांव में एंबुलेंस की सुविधा नहीं है और सड़क की हालत इतनी खराब है कि बीमार व्यक्ति को कंधे पर उठाकर ही स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना पड़ता है। कीचड़ में घिरे खेत, स्कूल और बाजार ग्रामीणों के लिए सपने जैसे रह गए हैं।

कई बार दिया गया आवेदन, नहीं मिली राहत

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत और यहां तक कि कलेक्टर तक आवेदन दिए, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से लोगों में गहरी नाराजगी है। चुनाव के समय किए गए वादे बरसात के साथ बह जाते हैं।

पीएम सड़क योजना का निर्माण अब तक अधूरा

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत हर्रई से रैगड़ियाटोला तक की 2.65 किमी सड़क को वर्ष 2024-25 में मंजूरी मिली है। मार्च 2025 में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। अनुमानित लागत 1.53 लाख रुपये तय की गई है, लेकिन काम अब भी शुरू नहीं हुआ है। विभाग का कहना है कि बरसात बाद निर्माण शुरू होगा, मगर ग्रामीणों को इस वादे पर अब भरोसा नहीं।

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