फिक्की ने आयात शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया

नई दिल्ली, 30 जुलाई (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहली अगस्त से भारत से निर्यात पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क और जुर्माना लगाने की घोषणाओं को दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक बताते हुए उम्मीद जतायी है कि इस तरह की व्यापार प्रतिरोधी कार्रवाई अल्पकालिक साबित होगी।

फिक्की का कहना है कि अमेरिका भारत के निर्यातकों के लिए एक बड़ा बजार है साथ ही यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत अमेरिकी व्यवसायों के लिए एक बड़ा बाज़ार प्रदान करता है। अमेरिका की कई बड़ी कंपनियाँ माँग के साथ-साथ हमारे कौशल और प्रतिभा भंडार का लाभ उठाकर लाभान्वित होती हैं।

फिक्की के अध्यक्ष श्री हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा, ‘ फिक्की, अमेरिका द्वारा भारत से निर्यात पर 25 प्रतिशत प्रशुल्क लगाने और जुर्माना लगाने के फैसले से निराश है। हालाँकि यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका हमारे निर्यात पर स्पष्ट प्रभाव पड़ेगा, हमें उम्मीद है कि उच्च आयात शुल्क लगाना एक अल्पकालिक घटना होगी और दोनों पक्षों के बीच एक स्थायी व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले लेगा।’

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच दीर्घकालिक साझेदारी है और यह दोनों के बीच प्रौद्योगिकी से लेकर रक्षा, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण तक, विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से और मज़बूत हुई है। फिक्की प्रमुख ने कहा, ‘ दोनों देश मिलकर बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं, और फिक्की को विश्वास है कि वर्तमान में चल रहे विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, जब अंतिम व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आएगी, तो हम दोनों देशों के लिए लाभकारी परिणाम देखेंगे।’

फिक्की का कहना है कि भारत इस वर्ष की शुरुआत से ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौते (बीटीए) पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है, और ‘ हम समझते हैं कि अमेरिका की ओर से कुछ विशिष्ट माँगें आई हैं जो हमारे राष्ट्रीय हित में नहीं हैं और इसलिए भारत सरकार ने अमेरिका की उन माँगों को स्वीकार नहीं किया है।

बीटीए पर आगे चर्चा करने के लिए अमेरिकी टीम अगस्त के उत्तरार्ध में भारत आ रही है। फिक्की को उम्मीद है कि दोनों पक्ष अपनी चर्चाओं में प्रगति करेंगे और सितंबर-अक्टूबर तक वार्ता पूरी कर लेंगे।

फिक्की ने कहा है कि भारतीय निर्यातकों के लिए वस्तुओं और सेवाओं, दोनों के क्षेत्र में अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है और उद्योग जगत इस देश के साथ एक दीर्घकालिक स्थायी समझौता करना चाहेगा। जैसा कि हमारे माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने ज़ोर देकर कहा है कि भारत व्यापार वार्ताओं में समय-सीमाओं को पूरा करने की तुलना में राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। हमारा उद्देश्य एक लाभदायक समझौता सुनिश्चित करना है, न कि जल्दबाजी में किया गया कोई ऐसा समझौता जो अल्पकालिक लाभ तो देता है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से प्रतिकूल परिणाम दे सकता है।’

 

 

 

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