
दमोह। स्थानीय अथाई आमचौपरा मार्ग पर स्थित श्रीदेव रासबिहारी राधाकृष्ण मंदिर में चल रहे गुरु पूर्णिमा महा महोत्सव एवं श्रीमद् भागवत कथा का आज बिश्राम हो गया भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया गया है गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों एवं नगरों से पहुंचे सैकड़ों शिष्यों एवं श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य कथाव्यास आचार्य पंडित रवि शास्त्री जी महाराज का विधिवत पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य गुरु चरण पूजन से हुआ शिष्यों ने पुष्पमालाएं अर्पित कर, चरण वंदन कर एवं आरती उतारकर अपने गुरु के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण व्यक्त किया सम्पूर्ण परिसर जय गुरुदेव के उद्घोष से गूंज उठा गुरु पूजन के दौरान श्रद्धालुओं की भाव-विभोर अवस्था यह दर्शा रही थी कि सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान कितना महान और सर्वोच्च है गुरु केवल मंत्र देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला पथप्रदर्शक होता है गुरु शिष्य के अंतःकरण में छिपे दिव्य ज्ञान को जागृत कर उसे धर्म, सत्य, संयम एवं ईश्वर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य संसार का अंधकार दूर करता है, उसी प्रकार सद्गुरु जीव के अज्ञान का नाश कर आत्मज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों का विभाजन कर, अठारह पुराणों तथा महाभारत की रचना कर सम्पूर्ण मानव समाज पर महान उपकार किया इसी कारण गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है इस दिन गुरु की पूजा करना, उनका सम्मान करना एवं उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना प्रत्येक सनातनी का परम कर्तव्य है गुरुपूर्णिमा महोत्सव के साथ-साथ आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भी अत्यंत श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ समापन हुआ अंतिम दिवस में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कथाओं का श्रवण मनुष्य के समस्त पापों का नाश करता है तथा जीवन को धर्ममय एवं आनंदमय बनाता है कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में भाग लिया और भगवान के दिव्य नाम का संकीर्तन किया
कथा की पूर्णता पर वैदिक आचार्यों द्वारा विधिवत हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न कराई गई। यज्ञ में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि, गौ संरक्षण, सनातन धर्म की उन्नति तथा समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना की वैदिक ऋचाओं एवं मंत्रोच्चार से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं दिव्य हो उठा पूर्णाहुति के उपरांत महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना दूर-दराज़ से आए भक्तों ने इस आध्यात्मिक आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कथाएं एवं गुरु सान्निध्य समाज में नैतिकता, सदाचार एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं कार्यक्रम में अनेक श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए आजीवन धर्म, सेवा, सत्य एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। युवाओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि वर्तमान समय में भौतिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति भी आवश्यक है गुरु का सान्निध्य मनुष्य को संस्कारवान बनाता है और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है
उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारत की अमूल्य धरोहर है, जिसे अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी का दायित्व है जिस समाज में गुरु का सम्मान होता है, वहां ज्ञान, संस्कृति एवं धर्म की ज्योति सदैव प्रज्वलित रहती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु के उपदेशों का पालन करते हुए सेवा, विनम्रता एवं सदाचार का आचरण करना चाहिए
गुरुपूर्णिमा महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा के इस दिव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, श्रद्धा एवं आत्मविश्वास का नया संचार किया कार्यक्रम का समापन वैदिक मंगलाचरण, पूर्णाहुति, आरती एवं सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष पुनः इसी प्रकार के भव्य आयोजन में सम्मिलित होने का संकल्प व्यक्त किया तथा आयोजकों के प्रति आभार प्रकट किया
