
मुरैना। कस्बा झुंडपुरा में बिना किसी एलोपैथी डिग्री और ड्रग स्टोर के लाईसेंस के बिना अनुचित रूप से प्रतिबंधित दवाओं का संधारण व विक्रय करते हुए मिले पाराशर क्लीनिक के संचालक संजीव पाराशर को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सबलगढ़ राजेश जैन ने औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम-1940 की धारा-27(बी) में दोषी मानते हुए 3 वर्ष सश्रम कारावास और 1 लाख रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किए जाने का फैसला सुनाया है।
इस प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार औषधि निरीक्षक देशराज सिंह यादव ने एक शिकायत के आधार पर झुंडपुरा में संचालित पाराशर क्लीनिक का 20 नवंबर 2019 को औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान क्लीनिक पर भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का संधारण और विक्रय किया जाना पाया गया। क्लीनिक संचालक संजीव पाराशर पुत्र जगदीश प्रसाद पाराशर निवासी ग्राम झुंडपुरा मौके पर औषधि विक्रय अनुज्ञप्ति सहित क्लीनिक एवं दवाओं के संधारण, विक्रय से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। औषधि निरीक्षक ने क्लीनिक से प्रतिबंधित डाइक्लोफेनेक सोडियम इंजेक्शन की 30 मिली की दो वॉयल भी जब्त की। क्लीनिक संचालक संजीव पाराशर के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 एवं नियमावली-1945 की धारा-18सी सहित अन्य धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। अनुसंधान के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने मामले के विचारण के बाद क्लीनिक संचालक संजीव पाराशर को औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम-1940 की धाराओं के तहत दोषी मानते हुए 3 वर्ष सश्रम कारावास और 1 लाख रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किए जाने का फैसला सुनाया है।
