
दमोह। गुरु पूर्णिमा का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंद्रभान सिंह पटेल, अध्यक्ष, जनभागीदारी समिति रहे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. एन. पी. नायक सेवा निवृत प्राध्यापक व डॉ. रेखा जैन सेवा निवृत प्राध्यापक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जी. पी. चौधरी ने की। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान, गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता तथा शिक्षा के माध्यम से नैतिक व मानवीय मूल्यों के संवर्धन पर विचार व्यक्त किए गए।
मुख्य अतिथि चंद्रभान सिंह पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु केवल ज्ञान के प्रदाता ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण व राष्ट्र निर्माण के आधार स्तंभ हैं , उन्होंने कहा कि ज्ञान की अनंत सीमा का नाम ही गुरु है। विशिष्ट अतिथि डॉ. एन. पी. नायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज निर्माण में गुरुओं की महत्वपूर्ण है। डॉ. रेखा जैन ने गुरु पूर्णिमा के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन व सतत अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. जी. पी. चौधरी ने गुरु पूर्णिमा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु का मार्गदर्शन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों तथा उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक – डॉ अरुणा जैन , डॉ अवधेश जैन , डॉ डी के नेमा , डॉ मालती नायक, डॉ आराधना श्रीवास , डॉ बृजेन्द्र सिंह कुसमरिया , डॉ जया अहिरवार , डॉ प्रीति वर्मा , डॉ ब्रजेश मौर्य , डॉ प्रणव मिश्रा डॉ दिनेश पटेल, डॉ पूजा तंतवाय, डॉ शिवशंकर मरकाम, डॉ आदेश नामदेव , डॉ सुधांशु तिवारी, डॉ अमिता श्रीवास्तव , डॉ रामपवित्र गौतम , डॉ अजय सिंह , डॉ ममता संघी, डॉ अनुभा तिवारी, श्री सौरभ खरे, श्री संतोष दुबे सहित समस्त प्राध्यापक अधिकारी-कर्मचारी एवं छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ अवधेश कुमार जैन व आभार प्रदर्शन डॉ राजू प्रसाद अहरवाल ने व्यक्त किया।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के सजीव प्रसारण का अवलोकन किया गया।
यह आयोजन गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा विद्यार्थियों में नैतिक व शैक्षणिक चेतना के विकास की दृष्टि से अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी रहा।
