
जबलपुर। हाईकोर्ट ने निशुल्क विधिक सहायता के तहत अधिवक्ता नियुक्त करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब किसी अपीलकर्ता की ओर से निजी अधिवक्ता का वकालतनामा पहले से रिकार्ड पर था और वह नियमित रूप से पैरवी भी कर रहा था, तब लीगल एड के माध्यम से दूसरा वकालतनामा कैसे जारी कर दिया गया। मामले को जांच योग्य मानते हुए हाईकोर्ट ने उच्च न्यायालय लीगल सर्विसेज कमेटी जबलपुर की सचिव से दो दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामे के साथ जवाब मांगा है।
जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ के समक्ष रायसेन निवासी सुजीत धाकड़ की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया। रिकार्ड के अनुसार अधिवक्ता विजय कुमार पांडे ने वर्ष 2023 में वकालतनामा दाखिल किया था और वे लगातार मामले की पैरवी कर रहे थे। इसके बावजूद वर्ष 2025 में हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी ने अधिवक्ता विवेक गौतम के पक्ष में लीगल एड के तहत नया वकालतनामा जारी कर दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर विषय बताते हुए पूरी प्रक्रिया का स्पष्टीकरण तलब कर लिया। कोर्ट ने सचिव से यह भी पूछा है कि संबंधित अपीलकर्ता निश्शुल्क विधिक सहायता पाने का पात्र था या नहीं तथा क्या उसने लीगल एड के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया था। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
