हादसे का अमिट दर्द क्या समझ पाएंगे जिम्मेदार?

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

ओंकारेश्वर में दर्शन को आए श्रद्धालु परिवार को स्थनीय सरकार की लापरवाही ने जो अमिट दर्द दिया है, वह जिम्मेदार समझ पाएंगे क्या? मासूम की मौत पर जांच बैठा दी गई, पर जो जान गई उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. विगत दिनों का वाकिया है, पवित्र नगरी में दर्शन करने पहुंचे नागपुर महाराष्ट्र के एक परिवार का कुल-दीपक गंदगी में डूबकर मर गया. अतिक्रमण बताकर प्रशासन ने लौवंशी धर्मशाला तोड़ दी. उसका सेप्टिक टैंक और गंदगी वैसा ही खुले पड़ा रहा. इसमें एक 3 साल का बच्चा गिर गया. समझिए उसकी मौत किस तरह हुई होगी? बदनसीब वह बच्चा या परिजन नहीं, दोष ओंकारेश्वर और खंडवा जिले के प्रशासनिक सिस्टम का है. कैसे सिंहस्थ में व्यवस्थाएं ये संभाल पाएंगे? इतनी दर्दनाक मौत भगवान ओंकारेश्वर मंदिर के पास चित्रगुप्त ने कैसे लिखी होगी? उनका भी हृदय कांप गया होगा. फिलहाल दोष नीचे बने धरती के सिस्टम को ही दिया जा सकता है. लापरवाही में छोटे कर्मचारी भले नप जाएंगे, लेकिन मामला ऊंची नजर से देखने का है. अफसरों को भी इसमें नौकरी का चटका लगाना चाहिए. सिंहस्थ 2028 में जब लोग लाखों की संख्या में पहुंचेंगे, तो क्या ऐसी व्यवस्था भुगतेंगे? यह बिल्कुल अन्याय है. यदि व्यवस्था प्रशासन से नहीं चल पा रही है, तो क्या सनातन का ढिंढोरा पीटने वालों को मंदिर के पट बंद कर दिए जाने चाहिए? ताकि दर्शनार्थी यहां पहुंचे ही नहीं, आज बड़े स्तर पर कार्रवाई जरूरी है. वैसे मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस दुर्घटना की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. फिलहाल स्थानीय प्रशासन धर्मशाला संचालकों पर दोष मढऩे की कोशिश में लगा है.

अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए अड़े दसेड़ा

जावरा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने ताराखेड़ी-नगरी सडक़ निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है. गत लोक सभा चुनाव में क्षेत्र के ग्रामीणों ने सडक़ निर्माण के आश्वासन पर ही मतदान किया था, वरना वे इसे लेकर मतदान बहिष्कार पर उतारू थे. एक किलोमीटर की सडक़ के निर्माण में 17 माह बीतने पर भी निर्माण अधूरा बताया जा रहा है. दसेड़ा के अनुसार ताराखेड़ी से नगरी तक लगभग एक किलोमीटर डामरीकरण सडक़ का कार्य फरवरी 2025 में करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत हुआ था. कार्यादेश जारी होने के 17 माह बाद भी सडक़ निर्माण अधूरा पड़ा है. उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा ठेकेदार को स्वीकृत राशि का लगभग पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि करीब 20 लाख रुपये लागत का डामरीकरण कार्य अभी भी बाकी है. इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग के साथ दसेड़ा निर्धारित कार्य से अधिक भुगतान करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई पर अड़ गए हैं.

मनोज चौधरी की आपत्ति से पद अटका

देवास भारतीय जनता युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष नियुक्ति की कवायद के बीच गद्दारी विवाद ने जोर पकड़ लिया है. हाटपिपल्या विधायक मनोज चौधरी ने तथाकथित नाम पर एतराज जताया है. मनोज चौधरी के अनुसार 2023 के विधान सभा चुनाव में कुछ लोगों ने पार्टी के साथ गद्दारी कर उन्हें हराने का प्रयत्न किया था, ऐसे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को संगठन में जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए. मनोज चौधरी ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भेजे शिकायती पत्र में विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. हालांकि विधायक ने सार्वजनिक रूप से किसी का नाम लेने से परहेज किया है, लेकिन भाजपा के अंदरखाने कुछ नामों की चर्चा तेज है. उधर, जिन नेताओं के नाम चर्चाओं में हैं, उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया है. खैर मनोज चौधरी की आपत्ति के बाद अभी तो भाजयुमो जिलाध्यक्ष पद पाने की लालसा लिए नेताओं का मामला अटक गया है.

Next Post

शिक्षा से लेकर खेल, रोजगार से लेकर स्वरोजगार युवाओं के हर सपने को पूरा कर रही डबल इंजन सरकार-भजनलाल

Tue Jul 28 , 2026
जयपुर, 28 जुलाई (वार्ता) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि विचारशील, अनुशासित एवं संस्कारवान युवा विकसित भारत-विकसित राजस्थान के आधार हैं और राज्य सरकार शिक्षा से लेकर खेल, रोजगार से लेकर स्वरोजगार तक युवाओं के हर सपने को पूरा करने में उनके साथ खड़ी है। श्री शर्मा […]

You May Like