
दमोह। वर्षायोग व चातुर्मास स्थापना संकल्प दिवस के अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि समता सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “वर्षायोग” केवल वर्षा ऋतु का नाम नहीं, बल्कि प्रकृति की वर्षा और गुरु-जिनवाणी कीअमृतवर्षा का पावन संगम है।जिस प्रकार वर्षाऋतु धरती को भिगोकर उसे उर्वरक बनाती है,उसी प्रकार गुरु की वाणी मनुष्य के कठोर हृदय को कोमल बनाकर जीवन का रूपांतरण करती है,उन्होंने कहा कि पत्थर केवल बाहर से भीगता है,लेकिन मिट्टी बाहर और भीतर दोनों ओर से भीगकर शिल्पी के हाथों “मूक माटी” बन जाती है।इसी प्रकार जो साधक गुरु की वाणी और जिनवाणी से भीगता है,वही अपने जीवन को श्रेष्ठ संस्कारों के अनुरूप ढाल पाता है।
मुनि श्री ने कहा कि पिछले दिनों की प्रचंड गर्मी के बाद जैसे ही संघ का कुण्डलपुर में मंगल प्रवेश हुआ, प्रकृति ने शीतल बादलों और वर्षा से सभी का स्वागत किया।यह केवल प्राकृतिक संयोग नहीं, बल्कि गुरु-कृपा का मंगल संकेत है।बाहर प्रकृति की वर्षा शरीर को तृप्त करती है, जबकि गुरु की करुणा और जिनवाणी की वर्षा आत्मा को हरा-भरा कर देती है।उन्होंने संत कबीर का पद उद्धृत करते हुए कहा— “कबीरा बदली प्रेम की, हम पर बरखा आई; अंतर भीगी आत्मा, हरी-भरी बन आई।”
उन्होंने कहा कि आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी का यह दिन श्रमण परंपरा में वर्षायोग एवं चातुर्मास का संकल्प दिवस है।इसी दिन आचार्य, मुनि, ऐलक और क्षुल्लक शास्त्रोक्त विधि से वर्षायोग धारण करने का संकल्प लेते हैं,यह आत्मजागरण, साधना और संयम का शुभारंभ है। मुनि ने भगवान महावीर के पूर्वभव की प्रेरक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि किस प्रकार एक हिंसक सिंह को मुनिराज के करुणामय उपदेश ने भीतर तक बदल दिया।गुरु के आत्मजागरण के संदेश से उसके परिणाम पिघल गए,पश्चाताप के आँसू बह निकले, उसने अहिंसा का व्रत धारण किया,और समाधिमरण कर यह जीव पुण्य के प्रताप से भगवान महावीर बने।उन्होंने कहा कि जब जीव के परिणाम बदलते हैं, तभी जीवन भी बदलता है और आत्मा महानता की ओर अग्रसर होजाती है। मुनि श्री ने कहा कि गुरुओं की देशना केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होती है।यदि श्रद्धालु चातुर्मास के दौरान गुरु-वाणी से अपने अंतर्मन को सींचेंगे,तो उनका जीवन भी मंगलमय,संयममय और आत्मकल्याणकारी बन जाएगा। समता सरोवर के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया प्रातःकाल बडे बाबा के चरणों में चातुर्मास संकल्प की सभी क्रियाएं संपन्न की गई। पूज्य बड़े बाबा की शांतिधारा मुनि श्री पवित्र सागर महाराज के मुखारविंद से संपन्न हुई उपरोक्त समय सभी ऐलक एवं क्षुल्लक कार्यक्रम में विराजमान रहे एवं भक्तियों का वाचन किया। भव्य मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम 9 अगस्त 2026 को कुण्डलपुर में आयोजित किया जाएगा।29 जुलाई बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दौपहर 2:30 बजे विद्यासागर सभाग्रह में गुरु पूर्णिमा महोत्सव कार्यक्रम आयोजित है। कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ एवं सभी पदाधिकारियों ने दमोह जिला सहित सभी आसपास श्रेत्र की जैन समाज से कुण्डलपुर क्षेत्र पर पहुचने का निवेदन किया है।
