
छतरपुर। महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व का भरोसा देने वाले जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। प्रसव पीड़ा से कराह रही अरुण यादव, पत्नी बाबूलाल यादव, को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने का आरोप है। परिजनों का कहना है कि सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद भी 10 से 15 मिनट तक कोई स्टाफ मदद के लिए नहीं आया। इसी दौरान महिला ने जिला अस्पताल की लिफ्ट के पास गैलरी में ही एक बच्चे को जन्म दे दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पहुंच जाता तो महिला को इस तरह खुले गलियारे में प्रसव नहीं करना पड़ता। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की गंभीर लापरवाही का उदाहरण है। प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में महिला की गरिमा, गोपनीयता और सुरक्षा की अनदेखी होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। घटना के बाद मां और नवजात को वार्ड में भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया हैं।
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करती है। यदि परिजनों के आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि प्रसूता और नवजात दोनों के जीवन को जोखिम में डालने वाली लापरवाही है। अब जरूरत है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर उपचार क्यों नहीं मिला और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी महिला को अस्पताल की गैलरी में बच्चे को जन्म देने जैसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
