कोच्चि, 28 जुलाई (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनो, जिनमें सीजेपी का प्रदर्शन भी शामिल हैं, के संबंध में टी.जी. मोहनदास की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। संघ ने कहा है कि उनके बयान उनकी निजी राय थे और वे संगठन के विचार नहीं हैं।
आरएसएस के दक्षिण केरल प्रांत सह-कार्यवाह के.बी. श्रीकुमार ने कहा कि संगठन का मोहनदास द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से कोई संबंध नहीं है और वह किसी भी तरह से ऐसी राय का समर्थन या उनसे सहमति नहीं रखता है।
श्रीकुमार ने कहा, “हाल के विरोध-प्रदर्शनों पर मोहनदास की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। वे किसी भी स्तर पर आरएसएस के पदाधिकारी नहीं हैं, आरएसएस उनके विचारों से सहमत नहीं है और ऐसे बयानों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोहनदास आरएसएस में किसी भी स्तर पर कोई ज़िम्मेदारी या पद नहीं संभालते हैं।
इस बीच, केरल सरकार ने नीट विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ मोहनदास के कथित नफ़रत भरे भाषण की पुलिस जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह उनके कथित बयानों की जांच करे और सरकार को रिपोर्ट सौंपे।
सरकार ने जांच का आदेश उन कथित बयानों की व्यापक आलोचना के बाद दिया जिन्हें उकसाने वाला और भड़काऊ बताया गया है। नीट उम्मीदवारों के विरोध प्रदर्शन और दिल्ली में हाल ही में हुए सीजेपी विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में दिए गए इन बयानों ने राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने उनके कथित बयानों की निंदा की है और मोहनदास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इन टिप्पणियों की अलग-अलग हलकों से भी आलोचना हुई है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
उम्मीद है कि सरकार पुलिस जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लेगी। इस विवाद ने विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कथित टिप्पणियों को लेकर मोहनदास के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की मांग को भी तेज़ कर दिया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक वीडियो सामने आया जिसमें मोहनदास ने कहा कि अगर उनके पास अधिकार होता तब वह जंतर-मंतर के आस-पास चार किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू लगा देते, प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए तीन बार चेतावनी देते और फिर पुलिस फायरिंग का आदेश देते।
