ईरान पर ट्रंप के सीमित होते विकल्प, सैन्य अभियान फिलहाल रोका गया

वाशिंगटन, 27 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष में दोराहे पर खड़े हैं, लेकिन हर गुज़रते दिन के साथ उनके विकल्प कम होते जा रहे हैं और किसी भी फैसले की सैन्य एवं राजनीतिक कीमत बढ़ती जा रही है। लगभग पांच महीने से जारी इस संघर्ष में अमेरिकी हवाई हमलों के बावजूद ईरान अपने रुख पर कायम है और कूटनीतिक प्रयासों से भी अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार 13 रात तक हवाई हमले करने के बाद अमेरिका ने रविवार को लगातार तीसरी रात भी बमबारी रोक दी। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह विराम कूटनीति के लिए अवसर देने के उद्देश्य से है, हालांकि उसने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिकी सेना फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप प्रशासन के भीतर यह चिंता बढ़ रही है कि लंबे समय तक चल रहे अभियान से सैन्य लाभ सीमित रह गये हैं, जबकि राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक लागत लगातार बढ़ रही है। इस बीच, ईरान ने हाल के दिनों में ओमान के साथ उप विदेश मंत्रियों स्तर की वार्ता की पुष्टि की है, लेकिन किसी महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत नहीं मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका के साथ संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन फिलहाल वार्ता की परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं। उन्होंने ऑस्ट्रिया के ओआरएफ टेलीविजन से कहा कि ईरान की पहली प्राथमिकता अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नागरिकों की रक्षा करना है।

दूसरी ओर, अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी लगातार हवाई हमलों की उपयोगिता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने अभियान समाप्त करने की सिफारिश करते हुए कहा कि अधिकांश निर्धारित सैन्य लक्ष्य पहले ही नष्ट किए जा चुके हैं और शेष उद्देश्यों को हासिल करने के लिए व्यापक जमीनी युद्ध जैसी बड़ी सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता होगी। वहीं, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने भी कथित तौर पर चेतावनी दी है कि वायु रक्षा मिसाइलों का घटता भंडार भविष्य में अमेरिकी बलों और क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी मानती हैं कि केवल हवाई हमलों से ईरान को अपनी वार्ता की स्थिति बदलने के लिए मजबूर करना संभव नहीं है। इस बीच, ओमान की मध्यस्थता में होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित रूप से खोलने पर बातचीत जारी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इससे अमेरिका के रणनीतिक उद्देश्य पूरे हो पाएंगे या नहीं। फिलहाल दोनों पक्षों ने बड़े हमले रोक रखे हैं और स्थिति को “शांति के बदले शांति” के दौर के रूप में देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सभी सैन्य विकल्प खुले रखे हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के सामने सैन्य कार्रवाई का विस्तार करने, आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करने या युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ने जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन प्रत्येक विकल्प के साथ गंभीर सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक जोखिम जुड़े हैं। उधर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के वैकल्पिक समुद्री मार्गों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में अगले मध्यावधि चुनावों से पहले भी श्री ट्रंप पर घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। हालिया सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों ने माना है कि यह युद्ध प्रशासन की अपेक्षा से अधिक कठिन साबित हुआ है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन ऐसे समाधान की तलाश में है, जिससे उसके रणनीतिक उद्देश्य भी पूरे हों और अमेरिका लंबे एवं आर्थिक रूप से खर्चीले संघर्ष में और अधिक न उलझे।

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